ऊना। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए) द्वारा विकसित ‘आपदा रक्षक’ मोबाइल एप्लीकेशन एवं डैशबोर्ड के सफल संचालन को लेकर वीरवार को जिला मुख्यालय ऊना में प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। जिला ऊना में आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को और अधिक सशक्त एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है।
प्रदेश सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशानुसार आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निदेशक एवं विशेष सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यशाला में जिला के विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों, आपदा प्रबंधन समन्वयकों तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।
जिला प्रशासन के प्रवक्ता ने बताया कि ‘आपदा रक्षक’ मोबाइल एप के माध्यम से किसी भी आपदा अथवा आपातकालीन घटना की भू-टैग रिपोर्टिंग की जा सकेगी। प्राप्त जानकारी को उपग्रह चित्रों पर मैप किया जाएगा, जिससे संकट की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने और राहत एवं बचाव कार्यों को शीघ्र शुरू करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि डैशबोर्ड में ‘पर्यटक निगरानी मॉड्यूल’ भी शामिल किया गया है, जो जिले एवं प्रदेश में पर्यटकों की गतिविधियों तथा उनसे संबंधित घटनाओं की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करेगा।
प्रवक्ता ने बताया कि 15 जून, 2026 को आयोजित होने वाली जिला स्तरीय मॉक ड्रिल के दौरान इस नई प्रणाली की कार्यक्षमता का लाइव परीक्षण किया जाएगा। मॉक ड्रिल के दौरान उत्पन्न सभी काल्पनिक आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों की रिपोर्टिंग इसी मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से की जाएगी, ताकि रियल टाइम रिपोर्टिंग सिस्टम एवं डैशबोर्ड की सटीकता, दक्षता और उपयोगिता का व्यापक मूल्यांकन किया जा सके। जिला प्रशासन का मानना है कि इस तकनीकी नवाचार से आपदा प्रबंधन व्यवस्था अधिक मजबूत, तेज और समन्वित बनेगी।
प्रशिक्षित अधिकारी बनेंगे मास्टर ट्रेनर
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के समन्वयक और विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी अब मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करेंगे। वे अपने-अपने विभागों एवं उपमंडलों के कर्मचारियों को एप और डैशबोर्ड के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। साथ ही विभागीय स्तर पर अधिकारियों के आधिकारिक पंजीकरण की प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी की जाएगी।