ऊना। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच डीजल के दामों में हुई करीब तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने प्रदेश के उद्योगों का दर्द और बढ़ा दिया है। डीजल के दाम बढ़ने से उद्योगों से माल ढुलाई का खर्च कारोबार का पूरा गणित बिगाड़ देगा। उद्योगपतियों के अनुसार डीजल महंगा होने के बाद माल ढुलाई दरों में करीब एक रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रति किलोमीटर तक बढ़ोतरी होगी। ऐसे में उद्योगों का मासिक परिवहन खर्च लाखों रुपये तक बढ़ने की आशंका है। डीजल के दाम बढ़ोतरी प्रदेश में संचालित छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदेश के 12 जिलों में करीब 3,926 बड़े और मध्य उद्योग संचालित हैं, जिसमें से बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़, ऊना, परवाणू और काला अंब में सबसे अधिक उद्योग स्थापित हैं। इन उद्योगों में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश कच्चा माल बाहरी राज्यों से ट्रकों के माध्यम से आता है जबकि तैयार उत्पाद भी देशभर के बाजारों तक सड़क मार्ग से भेजे जाते हैं।
......................
कहां कितने उद्योग
उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिला बिलासपुर में 183, चंबा में 139, हमीरपुर में 80, कांगड़ा में 864, कुल्लू में 60, किन्नौर में 43, लाहौल-स्पीति में 10, मंडी में 260, शिमला में 170, सिरमौर में 196, ऊना में 727, सोलन में 1194 उद्योग स्थापित हैं।
.................
खाड़ी युद्ध से एक तो पहले ही पैकिंग मेटेरियल के दामों में बढ़ोतरी हुई है और इसकी कमी से उद्योगों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। अब डीजल के दाम बढ़ने से माल भाड़ा भी बढ़ेगा। ऐसे में उद्योग नो प्रोफिट पर चलाने पड़ रहें हैं।
-राकेश कौशल, अध्यक्ष, टाहलीवाल उद्योग संघ
पहले ही उद्योगों में 30 से 40 प्रतिशत उत्पादन कम हो रहा है। अब डीजल के दाम बढ़ने से उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। ऊपर से प्रदेश सरकार ने एंट्री टैक्स भी बढ़ा दिया है। इस सब के बीच उद्योगों पर इसकी मार अधिक पड़ेगी।
-चमन कपूर, अध्यक्ष, मैहतपुर उद्योग संघ