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Una News: चैत महीने की धार्मिक महत्ता बता रही ढोलरू मंडली

Tue, 17 Mar 2026 06:29 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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संतोषगढ़ (ऊना)। मैं वर महादेव पाया सहेलियों, इस का वर्णन माता पार्वती अपनी सखी-सहेलियों से चैत्र माह में कर रही हैं। चढ़या चैत महीना धरमियां, शिव गौरां नू ब्याहन चल्ले। देसी महीनों में चैत्र माह को ही चैत महीने के नाम से जाना जाता है। चैत का धार्मिक महीना शुरू होते ही गायन मंडली ( जिसे स्थानीय भाषा में ढोलरू के नाम से जाना जाता है) के लोग बलदेव चंद व उनके बेटे राकेश कुमार एवं सुभाष चंद संतोषगढ़ नगर परिषद के साथ-साथ समीपवर्ती गांवों के घर-घर जाकर लोगों को चैत महीने की धार्मिक महत्ता बता रहे हैं। महीने का नाम अपने वाद्य-यंत्रों की धुनों पर गाकर सुना रहे हैं। इन पंक्तियों का अर्थ चाहे आज की युवा पीढ़ी न जान पाए लेकिन पुराने बुजुर्ग भली-भांति इस का अर्थ समझते हैं। ढोलरू मंडली पिछले लगभग चार दशकों से अपनी इस पुरातन सभ्यता का निर्वहन कर रही है। मंडली के सदस्य बलदेव चंद बताते हैं कि फाल्गुन के बाद चैत्र माह की शुरुआत होने पर वह और उनके साथी क्षेत्र के गांवों में जाकर लोगों को अपनी कला के जरिये पवित्र महीने का नाम सुनाते हैं। मंडली के सुभाष चंद व राकेश कुमार कहते हैं कि फाल्गुन व चैत माह के दौरान ही देवों के देव महादेव का शुभ विवाह मां पार्वती के साथ हुआ था। भगवान के विवाह की खुशी के गीत गाकर व धार्मिक माह चैत्र का नाम, महत्व बता कर वे घर-घर जाकर बधाई मांगते हैं। उन की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
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लोगों को भी चैत्र मास शुरू होने के उपरांत अपने घरों में इस गायन मंडली के आने का इंतजार रहता है। मंडली के गायन के बाद लोग उन्हें अपनी इच्छानुसार नए वस्त्र, अनाज व पैसे देते हैं। नगर के बजुर्गों रमेश चंद, सरवन सैनी, रजिंद्र कुमार, राम कुमार, बालकिशन, बलराम का कहना है कि पुराने समय से ही धार्मिक महीनों के समय गायन मंडली के लोग घर-घर पहुंच कर लोगों को धार्मिक महीने का नाम व महत्व समझाते हैं।
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