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Una News: बंगाणा क्षेत्र में एचआरटीसी बस सेवाओं की बहाली की मांग तेज, निजी ऑपरेटर कर रहे मनमानी

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परिवहन
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बंगाणा क्षेत्र के अधिकतर रूटों पर निगम की बस सेवा नहीं हुई बहाल
यात्री बोले- अब सड़कें हो चुकी हैं बहाल, बस चलाने में निगम ने नहीं उठाया कोई कदम

संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा के लोगों ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ऊना डिपो से बंद पड़ी बस सेवाओं को तत्काल बहाल करने की मांग उठाई है। स्थानीय जनता का कहना है कि पहले बंगाणा से चंडीगढ़, नंगल, नादौन, सुजानपुर सहित कई रूटों पर एचआरटीसी की नियमित बसें उपलब्ध रहती थीं, लेकिन अब इनके बंद होने से यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निजी बस ऑपरेटर मनमाने ढंग से सेवाएं चला रहे हैं। न केवल ज्यादा किराया वसूला जा रहा है, बल्कि बसों के समय भी यात्रियों की सुविधा के अनुसार तय नहीं होते। इसका सीधा असर विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और इलाज के लिए बाहर जाने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। स्थानीय निवासी सचिन, राजेश, वरिंदर कुमार, अशोक कुमार, सुभाष चंद, संदीप कुमार और अनिल कुमार ने संयुक्त बयान में कहा कि फिलहाल बंगाणा–नादौन रूट पर भ्यांबी के रास्ते केवल निजी बसें ही चल रही हैं। वहीं, एचआरटीसी ऊना डिपो की नंगल–नादौन–सुजानपुर–चंडीगढ़ वाया भ्यांबी तथा टूटू–बंगाणा वाया भ्यांबी बसें अभी तक शुरू नहीं की गई हैं। इसका खामियाजा प्रतिदिन सैकड़ों यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि अब सड़क पूरी तरह दुरुस्त हो चुकी है और बसें चलाने में कोई तकनीकी अड़चन नहीं है। इसके बावजूद सरकारी परिवहन सेवाएं शुरू न होने से लोगों को मजबूरी में निजी बसों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। युवाओं ने कुटलैहड़ विधायक विवेक शर्मा से भी इस विषय पर हस्तक्षेप कर बस सेवाएं शुरू करने की मांग की है।
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क्षेत्रवासियों ने परिवहन विभाग और प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि बंद पड़ी एचआरटीसी बसों को तुरंत बहाल किया जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके। इस संदर्भ में स्थानीय लोगों ने उपमुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर शीघ्र कार्रवाई की गुहार लगाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बस सेवाएं जल्द बहाल नहीं की गईं तो वे आंदोलन का सहारा लेने को मजबूर होंगे। उनका स्पष्ट कहना है कि सरकारी परिवहन सेवा ही ग्रामीणों की असली जीवनरेखा है और इसके बिना न तो ग्रामीण विकास संभव है और न ही लोगों की बुनियादी सुविधाएं पूरी हो सकती हैं।
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