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Una News: डेयरी फार्म से दिखाई स्वरोजगार की राह, रोजाना 3000 लीटर दूध का उत्पादन

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बड़ूही क्षेत्र बना दूध उत्पादन का हब
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महिलाएं और युवा दुग्ध उत्पादन से हो रहे आत्मनिर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। उपमंडल अंब के अंतर्गत टकारला, धंदरी, चुरुडू, दियाडा, बेहड़ जसवां की पंचायतों में लोगों ने बड़े पैमाने पर दूध उत्पादन कर स्वरोजगार की राह दिखाई है। बड़े डेयरी फार्म खोले गए हैं। युवा वर्ग भी इस डेयरी फार्म के कार्य को अपना रहा है। औसतन तीन हजार के करीब दूध उत्पादन यहां प्रतिदिन हो रहा है। दूध बेचकर महिलाएं और युवा अपनी जीविका कमा रहे हैं। बड़ूही क्षेत्र ऊना जिला में सबसे आगे है। दुग्ध उत्पादकों के घरों से नामी कंपनियां दूध खरीद कर ले जा रही हैं। इस समय क्षेत्र में सैकड़ों परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इस क्षेत्र से लगभग हजारों लीटर दूध का व्यवसाय हो रहा है। इस व्यवसाय के लिए सभी बैंक बड़े स्तर पर रियायती दरों पर लोगों को लोन उपलब्ध करा रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग बैंकों से लोन लेकर अपना दूध का व्यवसाय चला रहे हैं। महिलाएं भी इस व्यवसाय में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। चुरुडू से पंचायत समिति अंब के ब्लॉक उपाध्यक्ष संदीप ठाकुर का कहना है कि वह खुद इस व्यवसाय से जुड़े हैं। युवाओं को भी इस व्यवसाय को ज्यादा से ज्यादा अपनाना चाहिए। इस व्यवसाय से लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है। अमूल, वेरका, सुपर और हिमफेड सोसायटी जैसी नामी कंपनियां अच्छे दामों पर लोगो से दूध खरीद रही हैं।

टकारला की सोमलता का कहना है कि इस व्यवसाय से आमदनी के साथ-साथ देसी खाद भी भरपूर मात्रा में प्राप्त होती है। इसका प्राकृतिक खेती करने में उपयोग किया जाता है।
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टकारला के रफी मोहमद का कहना है कि डेयरी फार्म से हमारी घर की जीविका के साथ साथ शरीर भी तंदुरुस्त रहता है।
धंदरी टकारला से ब्लॉक समिति सदस्य तरसेम चंद का कहना है कि वह खुद इस व्यवसाय से सालों से जुड़े हैं। युवाओं को इस व्यवसाय को अपनाने का आग्रह भी किया है।
बड़ूही से वरिंदर चौधरी का कहना है कि मैंने सेवानिवृत्ति के बाद अपने बेटे के साथ डेयरी फार्म का व्यवसाय शुरू किया। रोजाना 80 से 100 लीटर तक दूध का उत्पादन कर रहे हैं।
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वेटरनरी ऑफिसर गोपाल कृष्ण का कहना है कि लोगों को हर सरकारी योजना का लाभ दे रहे हैं। युवाओं को इस व्यवसाय के बारे में प्रेरित कर रहे हैं। कुठयाडी, नंदपुर धंदरी, टकारला, बड़ूही, चुरूडू, हंबोली क्षेत्र में 4000 से 5000 पशुधन है। स्टॉफ दुग्ध उत्पादकों का पूरा सहयोग कर रहा है रोजाना यहां से औसतन तीन हजार लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।
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