फसलों के बचाव के लिए जरूरी दवाओं और खाद का होना है छिड़काव
खराब मौसम नहीं दे रहा किसानों को फसल बचाने का मौका
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला में सोमवार को दिनभर बारिश के बाद मंगलवार को भी मौसम खराब रहा। कई हिस्सों में बारिश हुई, जबकि अन्य क्षेत्रों में बूंदाबांदी दर्ज की गई। खराब मौसम का सबसे अधिक प्रभाव कृषि कार्यों पर पड़ा है। किसानों के लिए फसलों की देखरेख करना बेहद मुश्किल हो गया है। शनिवार और रविवार को मौसम साफ रहने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि वे आवश्यक दवाओं और खाद का छिड़काव कर सकेंगे, लेकिन सोमवार और मंगलवार को फिर से हुई बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जानकारी के अनुसार जिला में अगेती और पारंपरिक मक्की के साथ-साथ हरी सब्जियों की फसल तैयार हो रही है। इन फसलों के लिए सिर्फ सिंचाई ही नहीं, बल्कि पर्याप्त धूप भी जरूरी है। पिछले करीब एक माह से बारिश और बादलों का सिलसिला जारी है। कुछ ही दिन धूप निकली, जो फसलों के लिए पर्याप्त नहीं रही। किसानों अशोक कुमार, बलविंदर सिंह, अरविंद कुमार, रोहित सूद, अमृतपाल, जगतार सिंह और अमनदीप का कहना है कि कई दिनों से खेतों में अत्यधिक नमी है, जिससे फसलों में सड़न शुरू हो गई है। कुछ जगहों पर कीड़े और बीमारियों का प्रकोप भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि कीटनाशकों का छिड़काव धूप में ही प्रभावी होता है, लेकिन लगातार खराब मौसम के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा। अगर तीन से चार दिन लगातार धूप नहीं निकली, तो खेतों में काम करना भी मुश्किल रहेगा। किसानों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो मक्की की पैदावार बेहद कम हो जाएगी, और वे अपनी लागत भी नहीं निकाल पाएंगे। इस संबंध में जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि अच्छी धूप फसलों के लिए बेहद जरूरी है। खराब मौसम में फसलों की देखभाल कर पाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगेती और पारंपरिक मक्की की फसलें लगातार प्रभावित हो रही हैं और मौसम साफ होने के बाद ही जरूरी उपाय किए जा सकेंगे।