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शाश्वत सुख के लिए प्रभु से जोड़ें संबंध : अतुल कृष्ण

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कहा, अपने वास्तविक स्वरूप का ज्ञान बड़ी उपलब्धि
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संवाद न्यूज एजेंसी

अंब (ऊना)। बिना परिश्रम के शाश्वत सुख पाना चाहते हैं तो प्रभु से संबंध जोड़ लेना चाहिए। यद्यपि हमारा नाता परमात्मा से सदैव ही जुड़ा हुआ है। पर न तो मानते हैं और न उसे जानते ही हैं। जुड़ा हुआ मान लेंगे तो बेड़ा पार हो जाएगा। हम भगवान के हैं और भगवान हमारे हैं, यह तथ्य अपने अंतः करण में गहराई से उतार लेना चाहिए। ये अमृत वचन श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन अतुल कृष्ण ने भक्तियोग आश्रम नैहरियां में सुनाए। उन्होंने कहा कि सदैव प्रसन्न रहना, मोतियों का खजाना मिल जाने से भी अधिक उत्तम है। हमें अपने वास्तविक स्वरूप का ज्ञान हो जाए तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। हम अपने सच्चिदानंद स्वरूप एवं परमात्मा, दोनों को सदियों से भूले हुए हैं। ईश्वर को भूलने में युग लगे हैं। लेकिन, स्मृति क्षण मात्र में हो सकती है। मनुष्य को उस घड़ी परम आनंद का अनुभव होता है। जब वह जान लेता है कि मैं परिस्थितियों का दास नहीं, उलझने वाला नहीं अपितु सभी परिस्थितियों का साक्षी हूं। प्रभु हमारे साथ हैं, जो होगा देखा जाएगा। इस भाव का उदय सर्वत्र ही सफलता का मार्ग प्रशस्त कर देता है। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की ओर से महारास, मथुरा में आकर कंस का उद्धार, संदीपनी ऋषि के आश्रम में विद्या प्राप्ति, द्वारका नगर का निर्माण एवं श्री रुक्मणी मंगल का प्रसंग लोगों ने बड़ी श्रद्धा से सुना।
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