योजना के दायरे में आने से नंगल खुर्द के रंजीत सिंह का सपना हुआ साकार
पांच मरले भूमि और गृह निर्माण के लिए एक लाख रुपये की पहली किस्त मिली
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हर इंसान अपने पक्के घर का सपना देखता है लेकिन कुछ के लिए यह सपना हालात और अभावों के बोझ तले दबकर बिखर जाता है। ऊना जिले के नंगल खुर्द निवासी 21 वर्षीय रंजीत सिंह और उनके भाई-बहनों के लिए भी अपने पक्के घर का सपना माता-पिता के असमय निधन के बाद एक अधूरी कल्पना बनकर रह गया था। हिमाचल सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना से मिली सहायता के बूते उनका यह सपना अब साकार हो रहा है। योजना के तहत रंजीत को लगभग पांच मरले भूमि और गृह निर्माण के लिए एक लाख रुपये की पहली किस्त प्राप्त हुई है। अब उस जमीन पर दो कमरों, लॉबी और शौचालय सहित एक पक्के घर की नींव रखी जा चुकी है। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत पात्र निराश्रितों को गृह निर्माण के लिए कुल तीन लाख रुपये की सहायता चार किस्तों में प्रदान की जाती है। साथ ही घर के लिए जमीन न होने की स्थिति में तीन बिस्वा तक भूमि भी राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाती है। रंजीत बताते हैं कि माता-पिता के असमय निधन के बाद उनके बड़े भाई ने पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। छह भाई-बहनों के इस परिवार के पास रहने को सिर्फ एक कमरा था और खाना, सोना, पढ़ना, सब कुछ उसी एक जगह पर होता था। संघर्षपूर्ण जीवन में एक मोड़ तब आया जब उन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की जानकारी मिली। उपायुक्त ऊना जतिन लाल का कहना है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की संवेदनशील सोच एवं कल्याणकारी दृष्टिकोण के अनुरूप जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना का लाभ प्रत्येक पात्र बच्चे तक समय पर और प्रभावी ढंग से पहुंचे।