चिंतपूर्णी दरबार में माथा टेकने के लिए खड़े श्रद्धालु। संवाद
19 हजार श्रद्धालुओं ने शीश नवाया, चिंतपूर्णी मंदिर में हुई सात्विक पूजा-अर्चना, नारियल की दी बलि
माता के मंदिर में बने हवन कुंड में पुजारियों ने डालीं आहुतियां
संवाद न्यूज एजेंसी
चिंतपूर्णी (ऊना)। माता चिंतपूर्णी मंदिर में चैत्र नवरात्र की अष्टमी पर विशेष रूप से पूजा-अर्चना की गई। माता की पावन पिंडी को दोपहर के समय स्नान करवाया गया। इस दौरान माता रानी को 56 प्रकार के भोग भी लगाए गए। आरती और कंजक पूजन भी किया गया। सुबह 10 बजे शुरू हुई विशेष पूजा-अर्चना दोपहर 12 बजे तक चली। श्री दुर्गा सप्तशती के मंत्रोच्चारण से पंडित राम कुमार कौल , संदीप कालिया, अमित कालिया, भूषण कालिया, रविंद्र शिंदा, सोनू, राकेश, रोहन इत्यादि ने विधिवत पूजा-अर्चना करवाई। पूजा-अर्चना के बाद नारियल की बलि दी गई।
चिंतपूर्णी मंदिर में सात्विक पूजा-अर्चना करवाई जाती है। इसलिए नारियल की बलि दी जाती है। इस दौरान माता के मंदिर में बने हवन कुंड में आहुतियां भी मंदिर के पुजारियों की ओर से डाली गईं। चैत्र नवरात्र अष्टमी पर 19 हजार श्रद्धालुओं ने माता चिंतपूर्णी मंदिर में हाजिरी लगाई। सुबह से ही माता के भक्तों की चहलकदमी बनी रही और शाम तक रौनक रही। मंदिर अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि अष्टमी पर 19 हजार श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। जिलाधीश और मंदिर आयुक्त जतिन लाल और एसपी ऊना राकेश सिंह ने अष्टमी के विशेष अवसर पर माता चिंतपूर्णी दरबार में पूजा की और आशीर्वाद लिया। मंदिर आयुक्त जतिन लाल ने माता चिंतपूर्णी के भक्तों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। सभी पर माता चिंतपूर्णी का आशीर्वाद बना रहे, ऐसी कामना की। बताया कि चैत्र नवरात्र मेले में प्रशासन की ओर से उचित प्रबंध किए गए हैं। उचित संख्या में सुरक्षा कर्मी, धूप से बचने के लिए छायामान, सफाई व्यवस्था, पेयजल इत्यादि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रद्धालु आराम से माता के मंदिर पहुंच रहे हैं और नवरात्रों में दर्शनों का लाभ ले रहे हैं।