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Una News: डेढ़ माह के भीतर दोबारा बढ़ा दिए सीमेंट के दाम, लोग परेशान

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कहा, सीमेंट उत्पादक प्रदेश में, दाम बढ़ोतरी न्यायसंगत नहीं
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बोले -गरीबों के लिए मकान बनाना हुआ महंगा, सरकार दे राहत

संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। प्रदेश में अल्ट्राटेक, एसीसी और अंबुजा सीमेंट के दाम में पांच रुपये प्रति बोरी बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। निर्माण कार्यों में लोगों को और जेब ढीली करनी पड़ेगी। डेढ़ महीने में सीमेंट के दाम में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 10 रुपये प्रति बोरी सीमेंट के दाम बढ़ाए गए थे। अब दोबारा बढ़ोतरी हुई है। सीमेंट के दाम लगातार बढ़ने से आम जनता में रोष है। लोगों का कहना है कि प्रदेश में निर्मित हो रही आवश्यक वस्तु का लगातार दाम बढ़ाना उचित फैसला नहीं है। इस बारे में बातचीत में स्थानीय लोगों ने इस फैसले पर अपनी राय रखी है।
आजकल मकान निर्माण का काम मंदा चल रहा है। लोग शादियों या धार्मिक कार्यों में लगे हुए हैं। ऊना जिले से बहुत सी जनता प्रयागराज स्नान करने भी जा रही है। इस बीच हिमाचल में जहां सीमेंट का उत्पादन होता है, वहां महीने बाद दोबारा दाम बढा दिए हैं। सरकार को चाहिए कि मकान बनाने की सामग्री के दाम कम करके जनता को राहत दे।
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जनक राज, सीमेंट विक्रेता
जिस राज्य में कोई उत्पाद तैयार होता है, वहां दूसरे राज्यों के मुकाबले वह वस्तु कम कीमत पर उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन, डेढ़ महीने में सीमेंट के रेट दोबारा बढ़ाकर गरीबों पर बोझ बढ़ाया गया। सरकार को दाम बढ़ाने हैं तो गैर जरूरी वस्तुओं का बढ़ाए।
कृष्ण कुमार, शिक्षाविद।

सीमेंट सरिया के दाम सातवें आसमान पर हैं। मजदूरी करने वाला आदमी कैसे सिर छिपाने के लिए छत बना सकता है। बार-बार सीमेंट के रेट बढ़ने से गरीब पर और मार पड़ रही है। सरकार बड़े हुए दाम वापस लेकर गरीबों को राहत दे।
वीरेंद्र कुमार
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डेढ़ महीने में दो बार रेट बढ़ना हमारी समझ से परे है। सरकार को साल की शुरुआत में ही सीमेंट के दाम तय कर देने चहिए ताकि गरीब और मध्य वर्ग को बार-बार महंगाई की मार न झेलनी पड़े।
संजीव कुमार
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चुनाव के समय हर राजनीतिक पार्टी महंगाई कम करने का ढोल पीटती है। जब सत्ता में आ जाते हैं तो सब भूल जाते कि क्या वायदे किए थे। छत तो हर एक के लिए चाहिए। संबंधित सामग्री भी सस्ती हो।
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सविता देवी
सरकार को चाहिए कि आम आदमी के लिए जो जरूरी वस्तुएं हैं, उनके दाम कम करें। अमीर आदमी को तो कोई फर्क नहीं पड़ता, गरीब हर प्रकार से पिस रहा है। सरकार को चाहिए कि गरीब को भी सिर छिपाने का सपना पूरा होना चहिए।
विशाल कुमार
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