चकसराय (ऊना)। उपतहसील जोल क्षेत्र में मौसम साफ होते ही किसानों ने आलू की फसल का जायजा लेना शुरू कर दिया है। वीरवार सुबह खेतों में पहुंचे किसानों को कई जगह आलू के पौधे सूखे हुए मिले। पौधों के सूखने का कारण जानने के लिए जब किसानों ने उन्हें उखाड़कर देखा तो मिट्टी के अंदर सुंडी द्वारा पौधे को काटे जाने की बात सामने आई, इससे आलू उत्पादकों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों के अनुसार सुंडी मिट्टी के अंदर रहकर आलू के पौधे को तने के पास से काट रही है। पौधा सुंडी द्वारा काटे जाने के बाद कुछ समय में सूखने लगता है। खेतों में इस तरह के पौधे दिखाई देने के बाद किसान फसल को बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव करने में जुट गए हैं। उनका कहना है कि समय रहते कीट के प्रकोप को नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका असर आलू की पैदावार पर पड़ सकता है।
कृषि विकास अधिकारी ऊना पवन कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि सुंडी के प्रकोप से बचाव के लिए विभाग की संस्तुति के अनुसार एम-45, कार्बेन्डाजिम और क्लोरो दवा का छिड़काव करें। उन्होंने किसानों से फसल में कीट के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते आवश्यक उपाय करने की अपील की है।
इस बार आलू की बिजाई के समय बारिश होने के कारण कई खेतों में आलू के पौधे कम उगे हैं। अब फसल निकलने के बाद सुंडी का प्रकोप सामने आने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। किसान पहले ही मौसम की अनिश्चितता से चिंतित हैं और अब कीट के कारण फसल को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
- प्रेम चंद, किसान, बैरियां
पौधों के सूखने का कारण पता चलने के बाद किसानों ने कृषि विभाग से सलाह लेना शुरू कर दिया है। विभाग की सलाह के अनुसार कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है ताकि शुरुआती स्तर पर ही सुंडी के प्रकोप को नियंत्रित किया जा सके।
मुनीश कुमार, किसान, बैरियां