ऊना। प्रदेश में बोरी वाली ठोस यूरिया और 12-32-16 खाद की सप्लाई आने वाले दिनों में 20 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम होगा। साथ ही विदेश से आयात किए जाने वाले यूरिया की निर्भरता भी खत्म होगी। इस दिशा में सरकार की ओर से प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार बोरी वाली खाद पर सरकार को इस साल 250 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी चुकानी पड़ी है। ऐसे में अगर इस खाद का उत्पादन 20 प्रतिशत भी कम होता है तो करीब 50 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी की बचत होगी। इसके लिए सरकार ने इफको को नैनो खाद का उत्पादन अधिक करने व किसानों को उसके फायदे बताने के निर्देश दिए हैं।
बताया जा रहा है कि सरकार को साल भर में 100 लाख टन के करीब यूरिया विदेश से आयात करना पड़ता है। ऐसे में अगर 20 प्रतिशत खाद का उत्पादन भी कम किया जाता है तो यूरिया का आयात बहुत कम हो जाएगा।
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बंद नहीं होगी बोरी वाली यूरिया
नैनो खाद की बाजार में दस्तक के साथ यह चर्चाएं भी चल रही हैं कि आने वाले दिनों में बोरी वाली ठोस खाद बंद हो जाएगी। इफको की मानें तो नैनो के साथ ठोस खाद का उत्पादन जारी रहेगा। इसका एक बड़ा कारण यह है कि नैनो खाद केवल फसल को पोषण पहुंचाती है। वहीं ठोस खाद जमीन के पोषक तत्वों को बरकरार रखती है।
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ठोस खाद पर सब्सिडी के बोझ को कम करने के लिए नैनो खाद बाजार में लाई गई है। ठोस खाद का उत्पादन बंद नहीं होने वाला। हालांकि, नैनो का इस्तेमाल बढ़ने पर ठोस खाद का उत्पादन कुछ कम हो सकता है।
भुवनेश पठानिया
राज्य विपणन प्रबंधक, इफको