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Una News: आलू की बंपर पैदावार, खेतों में मिल रहे खरीदार

Sun, 23 Nov 2025 05:08 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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छोटे किसान हो रहे मायूस, नहीं मिल रहा उचित दाम
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1200 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहे दाम
किसानों ने सरकार से उठाई एक समान रेट लागू करने की मांग

विजय कपिला

बड़ूही (ऊना )। अंब उपमंडल के टकारला, धंधड़ी, बेहड़ जसवां, ठठल, चूरूडू, नंदपुर, भैरा, दियाड़ा सहित आसपास की पंचायतों में इस बार आलू की रिकॉर्ड पैदावार ने किसान खुश है। सुबह होते ही खेतों में आढ़ती और स्थानीय कारोबारी फसल खरीद के लिए खेतों में पहुंच रहे। हालांकि वर्तमान में फसल की कीमत 1200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है। इससे किसानों को झटका जरूर लगा।
जानकारी के अनुसार किसानों को कुछ साल पहले तक चंडीगढ़, जालंधर, लुधियाना, भटिंडा और दिल्ली जैसी बड़ी मंडियों पर निर्भर रहना पड़ता था। लंबी दूरी और ज्यादा खर्च से किसानों की लागत बढ़ जाती थी। मगर कुछ साल से हालात बदले हुए। अब बड़े आढ़ती खुद गांवों में पहुंचकर खेतों से ही माल उठाने लगे हैं। इससे किसानों के समय, मेहनत और पैसे तीनों की बचत हो रही है। हालांकि किसानों को एक नई दिक्कत का सामना भी करना पड़ रहा। अलग-अलग आढ़ती एक ही दिन अलग दामों पर आलू खरीद रहे हैं। किसानों का कहना है कि सुबह बेहतर रेट मिलता है, जबकि दोपहर तक अचानक कीमतें गिर जाती हैं। मजबूरी में उन्हें कम भाव पर माल बेचना पड़ता है।
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स्थानीय किसान निर्मल सिंह, अनिल ठाकुर, संदीप ठाकुर, सुनील कुमार श्याम सुंदर, राधे श्याम, सुमन कुमार संजीव ठाकुर ने एक समान रेट लागू करने की मांग सरकार के सामने रखी है, ताकि उनकी कमाई स्थिर रह सके और उन्हें उचित मूल्य मिल पाए। आलू की बढ़ती मांग का फायदा स्थानीय छोटे व्यापारियों और खरीदार समूहों को भी मिल रहा है। कुछ स्थानों पर स्थानीय टोलियां आढ़तियों के साथ सेटिंग कर कम रेट पर किसानों से आलू खरीदकर अधिक दाम पर आगे बेच रही हैं
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-सेब की फसल कृषि उपज विपणन समिति के दायरे में आती है, जबकि आलू की फसल अभी कृषि उपज विपणन समिति के तहत नहीं आती। इस कारण किसानों को मूल्य निर्धारण में अस्थिरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में आलू की फसल को भी कृषि उपज विपणन समिति के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा।-कुलभूषण धीमान, जिला कृषि उपनिदेशक
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