संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हमें यह नहीं पूछना चाहिए कि भगवान कहां हैं। भगवान से पहले हमारे जीवन में भक्ति कहां है, इसकी खोज करनी चाहिए। लोग कहते हैं कि जब तक हमें भगवान का पता न हो तब तक भक्ति कैसे करें। परमात्मा को खोजने की हमने गलत जिज्ञासा पैदा कर ली, इसलिए समस्या खड़ी हो जाती है। उक्त अमृत वचन श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में परम श्रद्धेय अतुल कृष्ण महाराज ने शिव मंदिर, पंगलू में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि सामान्यतः लोग भगवान की खोज में निकलते हैं, क्योंकि भगवान की खोज में निकलते हैं। इसलिए भगवान को कभी उपलब्ध नहीं हो पाए। भगवान की खोज ऐसी ही है जैसे अंधा आदमी प्रकाश की खोज में निकले। अंधे को आंख खोजनी चाहिए, प्रकाश नहीं। आंख का उपचार खोजना चाहिए प्रकाश नहीं। भगवान की चिंता हमें छोड़ देनी चाहिए। हमें अपने हृदय में भक्ति का जागरण करना है। उन्होंने कहा कि हमें अपने प्रेम को क्षुद्र से मुक्त करना होगा। अंधा आदमी पत्थर को ही हीरा समझ ले, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। अंधे व्यक्ति के लिए पत्थर और हीरा, दोनों ही पत्थर हैं। आंख फर्क ला देती है, क्योंकि आंख में जौहरी छिपा है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से मुख्य यजमान ठाकुर मान सिंह, विश्व हिंदू परिषद कांगड़ा विभाग के सत्संग प्रमुख पवन बजरंगी, विहिप देहरा के जिला मंत्री त्रिलोक शर्मा, प्रकाश चंद्र, सुभाष चंद्र, राजिंदर पाल सिंह, कुलभूषण सिंह, साहिल ठाकुर, निखिल ठाकुर, कृशांश ठाकुर, करतार सिंह राणा सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।