हिमाचल व पंजाब के लोग मिलकर मानते हैं बैसाखी पर्व
अस्थाई बाजार में लोग करते हैं घरेलू सामान की खरीदारी
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। गेहूं की फसल के पककर तैयार होते ही किसानों के चेहरों पर खुशी तथा उल्लास झलकता है। इसी खुशी तथा उल्लास को दोगुना करता है बैसाखी पर्व। आज रविवार को हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के धार्मिक तथा रमणीक स्थल ब्रह्मोती तथा पंजाब के नंगल से सटे ऐतिहासिक कस्बे विभोर साहिब के पंजगाटडा में बसोआ (बैसाखी) पर्व मनाया जा रहा है। इस पर्व पर तड़के से स्नान के लिए लोगों का आना शुरू हो जाते है। लोग अस्थाई दुकानें लगाकर कारोबार करते हैं। बच्चों के खिलौने तथा हर तरह के घरेलू सामान की खरीदारी लोग इस मेले के दौरान करते हैं। खासतौर पर मिट्टी से बने बर्तनों की खरीदारी लोग बड़े उत्साह के साथ करते है। बच्चों में वसोआ पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है। हालांकि समय की साथ इस पर्व को मानने को लेकर भी काफी कुछ परिवर्तन आया है। लोग इस पर्व को मनोरंजन के साथ आस्था से जोड़कर भी देखते हैं और स्नान करने के उपरांत पूजा अर्चना भी करते हैं। मेले में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए यहां पर हर वर्ष लंगर की विशेष व्यवस्था भी रहती है। विभोर कस्बे से ब्रह्मोती को जोड़ने वाले एकमात्र संपर्क मार्ग पर बैसाखी पर्व के चलते भारी भीड़ देखी जाती है। जिससे कई कई घंटे तक वाहनों की आवाजाही में भी रुक जाती है। हिमाचल तथा पंजाब के बहुत सारे लोग सतलुज दरिया में, तो सैकड़ों की संख्या में लोग ब्रह्मोती में जाकर डुबकी लगाते हैं और सृष्टि रचयिता भगवान ब्रह्मजी का आशीर्वाद लेते हैं। ब्रह्मोती में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी महिलाओं तथा पुरुषों के लिए अलग से स्नान की व्यवस्था की गई है। स्थानीय मंदिर कमेटी की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह भी चेतावनी बार-बार दी जाती है कि स्नान करते समय वह सतलुज दरिया में आगे तक न जाएं। क्योंकि पानी के गहरा होने से इसमें अक्सर डूबने की आशंका बनी रहती है इसलिए सावधानी पूर्वक स्नान करें। ब्रह्मोती मंदिर के महंत महेश गिरी के अनुसार बैसाखी पर्व के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। उन्होंने बताया कि लोग शनिवार रात्रि को ही मंदिर परिसर में पहुंचना शुरू हो गए थे।