10 दिवसीय मेले में पहुंचे हजारों श्रद्धालु प्रसाद लेने के बाद घरों को लौटे
संवाद न्यूज एजेंसी
अंब(ऊना)। डेरा बाबा बड़भाग सिंह जी मैड़ी में बुधवार मध्यरात्रि को पंजे का प्रसाद मिलने के बाद होली मेला संपन्न हो जाएगा। 17 मार्च से प्रारंभ हुए मेला के अंतिम दिन बुधवार देर रात दो बजे से डेरा बाबा बड़भाग सिंह जी बेरी साहिब, गुरुद्वारा मंजी साहिब और कुज्जासर में पंजे के प्रसाद का वितरण किया गया।
प्रसाद के लिए होली के दिन निशान साहिब चढ़ने के बाद भी भारी संख्या में श्रद्धालु अपना डेरा जमाए रखते हैं, जबकि श्री आनंदपुर साहिब में होला मोहल्ला मेले में आए कई श्रद्धालु भी मैड़ी पंजे का प्रसाद लेने के लिए पहुंचते हैं। देसी घी में विशेष रूप से बनाए गए प्रसाद को होली के दिन कमरे में ढककर रख दिया जाता है और कमरों को बंद कर दिया जाता है। ध्यान रहे कि 10 दिन के बाबा बड़भाग सिंह होली मेले में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले का समापन होेने पर सड़कों पर एकाएक वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है।
मान्यता : लंबे समय तक खराब नहीं होता प्रसाद
माना जाता है कि बाबा जी अपनी उपस्थिति के लिए इस ढके हुए प्रसाद पर अपने हाथ की मोहर (पंजा का निशान) लगाते हैं। जिसे मेला समाप्ति के मौके पर श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। पंजे के प्रसाद के बारे में मान्यता है कि यह काफी समय तक खराब नहीं होता है। मेले से वापस लौटती संगत प्रसाद लेकर अपने गांव और शहर जाती है। इसके बाद इस प्रसाद को अपने लोगों में भी वितरित किया जाता है। कई लोग इस प्रसाद को घर में बनाए प्रसाद में मिलाकर भी लोगों को देते हैं, जिससे ज्यादा लोगों को प्रसाद का पुण्य मिल सके। प्रसाद के लिए देर शाम से श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगना प्रारंभ हो जाती हैं।
होली के दिन निशान साहिब चढ़ाए जाने के बाद के समय के बाद से मेले के तहत दिन को श्रद्धालु छुट्टियां कहते हैं और बाबा जी के भजन गाकर नए साल में मेले में आने का वादा कर संगतें अपने घरों के लिए प्रस्थान करती हैं। वहीं, डेरा बाबा बडभाग सिंह जी मैड़ी बेरी साहिब के सेवादार नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि बुधवार मध्यरात्रि पंजे के प्रसाद का वितरण किया गया।
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