चकसराय (ऊना)। जिला ऊना की उपतहसील जोल क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से मौसम साफ रहने और तेज धूप निकलने के बाद किसानों ने खेतों की ओर रुख कर लिया है। लगातार खराब मौसम के कारण खेतों में काम प्रभावित हो रहा था लेकिन अब मौसम अनुकूल होते ही किसानों ने फसलों का जायजा लेना शुरू कर दिया है।
किसानों ने गेहूं की फसल की स्थिति का निरीक्षण करते हुए यह आकलन किया कि इस समय फसल को उर्वरक और देखभाल की आवश्यकता है। फसल इस समय महत्वपूर्ण अवस्था में है, ऐसे में सही समय पर पोषण और रोग नियंत्रण बेहद जरूरी माना जा रहा है।
किसानों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों तक मौसम खराब रहने के कारण गेहूं में पीलिया ( पीला रतुआ) रोग बढ़ने की संभावना अधिक हो जाती है। उन्होंने कहा कि जैसे ही मौसम साफ हुआ, उन्होंने तुरंत फसल में रोग की रोकथाम के लिए दवाई का छिड़काव किया। इसके साथ ही फसल की मजबूती और बेहतर उत्पादन के लिए बोरॉन का भी छिड़काव किया गया है।
किसान बलदेव सिंह ने बताया कि मौसम में नमी रहने के कारण फसलों में बीमारियां तेजी से फैलती हैं। समय रहते दवाई का छिड़काव करने से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। उनका कहना है कि यदि किसान थोड़ी सतर्कता बरतें और समय पर उपाय करें तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
किसान जोगिंद्र सिंह ने कहा कि गेहूं की फसल इस समय बेहद नाजुक अवस्था में है। उन्होंने बताया कि संतुलित उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों का सही उपयोग करने से उत्पादन में काफी बढ़ोतरी होती है। उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की कि वह कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही खेती करें।
कृषि प्रसार अधिकारी चंदन शर्मा ने बताया कि गेहूं की फसल को पीला रतुआ रोग से बचाने के लिए शाइन टिल्ट दवा का छिड़काव काफी कारगर है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे समय-समय पर फसल की निगरानी करें और रोग के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत उचित दवाई का प्रयोग करें।