दुलैहड़ (ऊना)। होमगार्ड की सेवा से करीब 28 साल पहले हुई छुट्टी को चुनौती देने वाले पूर्व होमगार्ड को जिला एवं सत्र न्यायालय ऊना से भी राहत नहीं मिली। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीसी राणा की अदालत ने सेवा बहाली की मांग वाली अपील खारिज करते हुए उस पर 10 हजार रुपये लागत लगाई।
अदालत ने निचली अदालत के 28 अप्रैल 2026 के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि सेवा से छुट्टी के आदेश को चुनौती देने में करीब 25 साल की देरी हुई लेकिन अपीलकर्ता इस देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बता सका।
मामला 12वीं बटालियन होमगार्ड ऊना में तैनात रहे व्यक्ति से जुड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार वह 27 नवंबर 1988 से आठ अगस्त 1991 तक होमगार्ड के नियमित रोल पर रहा। 17 अक्तूबर 1991 को उसे सेवा से छुट्टी दी गई थी। डिस्चार्ज प्रमाणपत्र में चरित्र आकलन के दौरान संगठन और सरकार के प्रति वफादारी नहीं होने की टिप्पणी दर्ज थी।
सेवा से छुट्टी के करीब 25 साल बाद उसने 12 दिसंबर 2016 को सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर बहाली, वेतन, वित्तीय लाभ, पेंशन और अन्य परिणामी लाभ की मांग की। उसका तर्क था कि उसे अचानक सेवा से हटाया गया और पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया। निचली अदालत ने 28 अप्रैल 2026 को मुकदमा खारिज कर दिया, जिसके बाद उसने जिला अदालत में अपील की।
जिला अदालत ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि 17 अक्तूबर 1991 के आदेश को वर्ष 2016 में चुनौती दी गई। अदालत ने कहा कि करीब 25 साल तक कानूनी कार्रवाई नहीं करने का कोई ठोस कारण रिकॉर्ड पर नहीं आया। संवाद