नशे के खिलाफ लड़ाई में विद्यार्थियों को बनाया जाएगा रोल मॉडल
स्कूल के साथ आसपास के इलाकों में भी छेड़ा जाएगा अभियान
नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करेंगे विद्यार्थी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च स्कूलों में नशे के खिलाफ विशेष अभियान शुरू होगा। इसके तहत सभी स्कूलों में एंटी ड्रग क्लब बनाएं जाएंगे। इनमें विद्यार्थियों को भी शामिल किया जाएगा। क्लब के जरिये युवाओं को नशे के दुष्परिणाम बताए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को ये आदेश जारी किए हैं। अब आने वाले दिनों में इस पर कार्य शुरू होगा।
जानकारी के अनुसार सीमावर्ती जिला ऊना में विद्यार्थियों को स्कूली स्तर पर ही नशे की चपेट में लाने के लिए कई तरह के आपराधिक तत्व सक्रिय हैं। कई स्कूलों में बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थी नशे की जकड़ में आ रहे, जिसे ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूलों में एंटी ड्रग क्लब बनाने का फैसला लिया है। इन क्लबों में स्कूल के अध्यापकों का अहम रोल रहेगा, जो नशे के दुष्परिणामों के बारे में अन्य विद्यार्थियों व स्थानीय लोगों को जागरूक करेंगे। एंटी ड्रग क्लब में हर कक्षा के विद्यार्थियों को सक्रिय कर उन्हें नशे के दुष्परिणाम को लेकर गतिविधियां आयोजित कर प्रशिक्षित किया जाएगा। क्लब में अध्यापकों की भागीदारी भी रहेगी, जो विद्यार्थियों को समय-समय पर मार्गदर्शन देंगे। आसपास के इलाकों में रैलियां, नुक्कड़ सभाएं और अन्य आयोजनों में अध्यापक भी क्लब सदस्य विद्यार्थियों के साथ रहेंगे।
सीमावर्ती जिला होने के कारण ऊना में नशा तस्कर लंबे समय से सक्रिय हैं। बड़ी उम्र के युवाओं के साथ अब विद्यार्थी भी नशा तस्करों के निशाने पर हैं। स्कूलों के आसपास सुबह के समय और छुट्टी के दौरान तस्कर सक्रिय रहते हैं। कम उम्र के युवाओं को नशे की ओर मोड़ा जा रहा, जिसकी रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। इस गंभीर विषय पर पहले भी विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। अब एंटी ड्रग क्लब सालभर सक्रिय रहेगा।
शिक्षा उपनिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि सभी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च स्कूलों में एंटी ड्रग क्लब बनाए जाएंगे। इसे लेकर सभी शिक्षण संस्थानों को दिशा-निर्देश जारी किए गए। स्कूल खुलते ही इस पर काम होगा और विद्यार्थियों को इन क्लबों में सक्रिय तौर पर हिस्सेदारी मिलेगी, ताकि वह व्यावहारिक तौर पर इस बुराई के बारे में जान सकें और लोगों को जागरूक कर सकें।