पशुपालकों को महंगे दाम में मिल रही तूड़ी, 1000 प्रति क्विंटल है दाम
आने वाले दिनों में ओर बढ़ जाएगी पशुपालकों की परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। सर्दी के मौसम और लंबे समय से बारिश न होने से जिले में पशुपालकों के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। गैर सिंचित क्षेत्रों में हरा चारा सूखने लगा है। इससे पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दूसरी तरफ तूड़ी के भाव भी आसमान छू रहे हैं। जिले में तूड़ी के भाव 1000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहे हैं। इसे खरीदना आसान नहीं रहा है। दिसंबर और जनवरी में तूड़ी की मांग काफी बढ़ जाती है।
वहीं, गेहूं की नई फसल भी मौसम की बेरुखी से बर्बाद हो रही है। ऐसे में पशुपालक आने वाले समय को लेकर खासा चिंतित नजर आ रहे हैं। पशुपालक राकेश कुमार, अमरीक सिंह, सुनील सैनी, सतीश कुमार, बलविंदर सिंह ने बताया कि हर साल चारे के लिए तूड़ी खरीदनी पड़ती है। समय-समय पर बारिश होती रहे तो हरा चारा दिसंबर तक उपलब्ध रहता है। यह साल बेहद कम बारिश में गुजरा है। कुछ दिन में हरा चारा भी खत्म हो जाएगा और तूड़ी की जरूरत भी रहेगी। उन्होंने कहा कि पशुचारे का दाम भी तय नहीं रहता। कई लोग गेहूं कटाई के समय अधिक मात्रा में चारा इकट्ठा कर लेते हैं। जब मांग बढ़ती है तो मनमाने दाम वसूले जाते हैं। पशुपालकों ने कहा कि सबसे अधिक समस्या उन पशुपालकों को आती है, जिनके पास सालभर का चारा रखने का स्थान नहीं होता। उन्हें मजबूरन सर्दियों के दौरान दोबारा चारा खरीदना पड़ता है।
कोट्स
जिले से कई पशुपालक सर्दियों के मौसम में पशुओं का चारा खरीदते हैं। अधिकतर चारे की सप्लाई पड़ोसी राज्य पंजाब से आती है। वहां चारे के बड़े गोदाम हैं। जिला के कई लोग भी चारा खरीदने और बेचने का व्यापार करते हैं। हालांकि, अभी पशुओं के चारे के दाम निश्चित नहीं है। समय और मांग के अनुसार इनमें उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।
डॉ विनय शर्मा, उपनिदेशक, जिला पशुपालन विभाग।