आंगनबाड़ी, स्कूल, आईटीआई और कॉलेजों में चलाया जाएगा अभियान
99 हजार बच्चों को दी जाएगी डोज, छूटे बच्चों के लिए 28 अगस्त को होगा मॉप-अप राउंड
एक से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए सिरप भी पिलाया जाएगा
निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों के बच्चों को भी शामिल करने के निर्देश
सीएमओ ने कहा– शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की निगरानी में खिलाई जाएगी दवा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले भर में 21 अगस्त को 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को कृमिनाशक दवा एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी। यह दवा जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, निजी व सरकारी स्कूलों, आईटीआई और कॉलेजों में पढ़ने वाले बच्चों और युवाओं को दी जाएगी। शिक्षण संस्थानों से बाहर रहने वाले बच्चों को घर पर ही यह दवा खिलाई जाएगी। यह जानकारी उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में दी।
बचत भवन में आयोजित बैठक में उपायुक्त ने संबंधित विभागों को उचित दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि एक से पांच वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से विटामिन-ए सिरप भी पिलाया जाएगा। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर 21 अगस्त को यह अभियान चलेगा, जबकि छूटे हुए बच्चों के लिए 28 अगस्त को मॉप-अप राउंड किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमेंट उद्योगों, एनटीपीसी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य निर्माण कार्यों में कार्यरत मजदूरों के बच्चों को भी यह दवा खिलाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग और गैर सरकारी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया।
उपायुक्त ने बताया कि एक से पांच वर्ष आयु वर्ग के 23 हजार और एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के कुल 99 हजार बच्चों को यह दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने अधिकारियों को शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए। एक से दो वर्ष के बच्चों को आधी गोली के साथ 2 मि.ली. विटामिन-ए सिरप, दो से पांच वर्ष तक के बच्चों को पूरी गोली के साथ 2 मि.ली. सिरप और 6 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को पूरी गोली दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि बच्चों के पेट में कृमि संक्रमण से शारीरिक और मानसिक विकास रुकता है तथा कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। एल्बेंडाजोल दवा से पोषण स्तर बेहतर होता है, खून की कमी में सुधार होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा ने बताया कि जिले के विभिन्न सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में भी एक से 19 वर्ष तक के बच्चों को यह दवा शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा वर्करों की निगरानी में खिलाई जाएगी।