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अक्षय तृतीया... एक सदी बाद गजकेसरी राजयोग का है निर्माण : पंड़ित कृष्ण शर्मा

Fri, 10 May 2024 02:27 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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पंडित कृष्ण शर्मा
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बोले- इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सर्वसिद्ध मुहूर्त का है संयोग
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जसवीर ठाकुर
ऊना। इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सर्वसिद्ध मुहूर्त का संयोग है। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का पर्व बेहद शुभ माना जाता है। पंडित कृष्ण शर्मा के अनुसार इस साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाया जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो इस साल की अक्षय तृतीया बहुत ही शुभ रहेगी, क्योंकि अक्षय तृतीया पर 100 साल यानी एक सदी बाद गजकेसरी राजयोग का निर्माण होने वाला है। इतना ही नहीं अक्षय तृतीया के दिन देवगुरु बृहस्पति वृषभ राशि में रहेंगे। साथ ही अक्षय तृतीया के दिन चंद्रदेव भी वृषभ राशि में रहेंगे। यानी 10 मई को वृषभ राशि में गुरु और चंद्रमा का संयोग होगा। अक्षय तृतीया के दिन धर्म कर्म और मांगलिक कार्यों के विशेष फल मिलते हैं। दीघा पंचांग के अनुसार 10 मई को अक्षय तृतीया है। इस दिन नए कार्यों की शुरुआत गृह प्रवेश, दान, सोना, फ्लैट गाड़ियां के कार्य बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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पंचांग के अनुसार 10 मई को सुबह 4:16 पर अक्षय तृतीया की शुरुआत होगी और अगले दिन यानी 11 मई 2024 को प्रातःकाल 2:51 पर समाप्त होगा। इस दिन मुख्य रूप से सोने का दान, कपड़े का दान जल का दान कपड़ों का दान आदि अन्य दान करना चाहिए। इसके अलावा इस दिन आप घड़ा, शक्कर बर्फी नमक शरबत चावल आदि का दान भी कर सकते हैं। अक्षय तृतीया के दिन को अति शुभ मुहूर्त मानते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की अवतार परशुराम का जन्म हुआ था, यह चिरंजीव थे। इसलिए इस दिन को भूलकर भी तामसिक भोजन का सेवन भी नहीं करना चाहिए। सकारात्मक लाने के लिए अक्षय तृतीया पर सेंधा नमक खरीदने पर विचार करें। इस दिन बर्तन पीतल, तांबा, चांदी जैसे धातुओं से बने खरीदे जाते हैं। इन धातुओं से बने बर्तन खींचने से सौभाग्य और समृद्धि आती है। अक्षय तृतीया एक शुभ दिन है, जिस पर भगवान विष्णु का शासन है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेता युग की शुरुआत अक्षय तृतीया के दिन हुई थी।
अक्षय तृतीया का ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व



ज्योतिषीय महत्व से परे इस तिथि का धार्मिक महत्व भी है। अक्षय तृतीया सतयुग की शुरुआत का प्रतीक है, जो पवित्रता और समृद्धि का स्वर्ण युग है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को एक ऐसा अक्षय पात्र दिया था, जो चमत्कारिक रूप से सदैव भोजन या अन्न प्रदान करता था। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन ही देवी अन्नपूर्णा का जन्म हुआ था। इसलिए माना जाता है कि अक्षय तृतीया नए उद्यम या निवेश शुरू करने का समय है, उनका मानना है कि ऐसा करने से उनके जीवन में खुशी और समृद्धि आती है।
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अक्षय तृतीया पर बन रहे हैं ये शुभ योग

तृतीया तिथि आरंभ: 10 मई, शुक्रवार, प्रातः 04:16 मिनट पर

तृतीया तिथि समाप्त: 11 मई, शनिवार तड़के 02:51 मिनट पर



शुभ योग:

रोहिणी नक्षत्र: प्रातः 10:46 तक ,इसके उपरांत मृगशिरा नक्षत्र रहेगा।

अतिगंड योग : दोपहर 12:16 बजे तक, उसके बाद सुकर्मा योग रहेगा।

इस दिन रवि योग भी रहेगा।



अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का शुभ समय

प्रातः - 08:55 बजे से 10:36 बजे तक

दोपहर- 12:16 बजे से 04:56 बजे तक

सांय- 04:56 बजे से रात्रि 9:32 बजे तक

वैसे अक्षय तृतीया का दिन स्वयं सिद्ध मुहूर्त है यानी ये पूरा दिन ही अत्यंत शुभ फलदायक है। इस दिन राहुकाल को छोड़कर दिनभर में कभी भी सोना खरीद सकते हैं। राहुकाल सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक रहेगा।
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