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स्वतंत्रता सेनानी हुस्न लाल को पुष्पांजलि

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ऊना। स्वतंत्रता सेनानी हुस्न लाल डांग की पुण्यतिथि पर उनके परिजनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जनवरी 1913 में लाला अमी चंद अरोड़ा के घर पैदा हुए स्वतंत्रता सेनानी हुस्न लाल डांग के मन में बचपन से ही देश को आजाद करवाने की ललक भरी हुई थी। इस ललक को लेकर वह 15 वर्ष की आयु में बाल भारत सभा के प्रधान बन देश की आजादी की जंग में महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1928 में कूद पड़े थे। उन्होंने महात्मा गांधी की ओर से चलाए गए सत्याग्रह आंदोलन में 22 फरवरी 1941 में रायपुर में अंग्रेजों के खिलाफ भाषण देते हुए उन्हें पहली बार बंदी बनाया गया और मुकदमा चलाकर जेल भेज दिया गया। अंग्रेज सरकार ने उनकी ओर से चलाई गई घड़ियों की दुकान के ताले तोड़ सारा सामान निकालकर उस समय के कानूनगो और पटवारी की सहायता से नीलाम करवा दिया। हुस्न लाल जीवन के अंतिम दिनों तक भारत माता के सच्चे सपूत की तरह देश की आजादी के लिए लड़ते रहे। शुक्रवार को उनकी पुण्यतिथि पर उनके पुत्र ओपी डांग एवं अश्विनी कुमार, वीना अरोड़ा, प्रतिभा अरोड़ा ने उन्हें याद कर श्रद्धाजंलि अर्पित की।
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