मैहतपुर (ऊना)। महंगाई डायन ने दीपावली के उल्लास को उदासी में तबदील कर दिया है। साल-दर-साल बढ़ रही महंगाई से जनता बेबस है। खाने-पीने, मिठाई, ड्राई फ्रूट के दामों में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में मध्यमवर्गीय लोगों से लेकर निचले स्तर तक हर कोई बजट के जुगाड़ में परेशान है। दिवाली की उमंग को महंगाई ने मार डाला है। आलम यह है कि बाजारों में सजी मिठाई की दुकानों पर लोगों को भीड़ तो है, लेकिन खरीददार कम हैं। यही हाल खिलौनों एवं मिट्टी के बने बर्तनों की बिक्री को लेकर भी दिख रहा है।
बाजार में 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकने वाली जलेबी भी आम आदमी की पहुंच से दूर हो गई है। दिवाली मनाने की तैयारियों में लगे लोग हालांकि बाजारों का रुख जरूर कर रहे हैं, लेकिन लौटते वक्त यही वाक्या उनके मुंह से सुना जा रहा है कि क्या खरीदें, महंगाई ने मार डाला। गृहणियों में सुषमा, अंजना, अनीता, पूनम, रजनी, कामिनी, सुधा, सुमन ने बताया कि अब दिवाली भी दीवाले की तरह हो गई है। छोटी से छोटी चीज के दाम भी तीन से चार गुणा तक बढ़ चुके हैं। दिहाड़ी लगाकर गुजारा करने वाले कर्मचंद, हुसनलाल, राकेश, रोशन, प्रिंस तथा वतन चंद की मानें तो 100 रुपये की जलेबी खाने से तो अच्छा है कि वह इतने की दाल सब्जी घर ले जाएं तो पूरा परिवार दो दिन रोटी खा सकेगा। मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा भी अब इस महंगाई के चलते दम तोड़ती दिखाई दे रही है। कारण, आसमान को छू रहे सरसों के तेल के दाम लोगों को मजबूरी में मोमबत्ती जलाने पर विवश कर रहे हैं। मोमबत्ती भी खरीदने से पहले हाथ जलाने का काम कर रही है। कुल मिलाकर महंगाई से हर तबका मुश्किल में है।