ऊना। जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने विस चुनाव में जाटों, सिखों एवं महिलाओं की भागीदारी शून्य के बराबर किए जाने पर राजनीतिक दलों के खिलाफ रोष जाहिर किया है। प्रदेश में जाटों को राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से बाहर रखकर उनकी पूर्ण अनदेखी की गई है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष कैप्टन मदन लाल हीर ने कहा कि राजनीतिक दलों ने टिकटों की बंदरबांट की है। जाट एवं सिख समुदाय का वोट बैंक एक लाख के करीब है। विस चुनाव में जाटों को 68 में से 26 सीटों पर अधिमान दिया जाना चाहिए था। लेकिन, सभी पार्टियों ने इस वर्ग को सत्ता से दूर रखने का काम किया है। उन्हाेंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे सियासी दलों की सत्ता की डगर आसान नहीं है। उन्होंने जाटों, सिखों और महिलाओं से आह्वान किया है कि एका कर सभी राजनीतिक दलों को सबक सिखाएं। इस मौके पर कैप्टन अमरीक सिंह बैंस, राम किशन लंबड़दार, गुरचरण सिंह, उजागर सिंह, सुरजीत सिंह, सतनाम सिंह, जगतार सिंह, जीत सिंह दयाल, कुलदीप सिंह, तेलू राम अटवाल, महेंद्र सिंह माहल, तारा सिंह नेगी, राम मूर्ति, भूपिंद्र सिंह संधू, मंगा सिंह, तारा सिंह गिल, प्रेम सिंह और राम स्वरूप सिंह सहित बड़ी संख्या में जाट नेता मौजूद थे।