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केमिकल उद्योग के पानी से प्रदूषित हुए जलस्रोत

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मैहतपुर (ऊना)। ऊना के सरहदी क्षेत्र नया नंगल में स्थित पीएसीएल उद्योग के गंदे पानी को लेकर जिला प्रशासन ऊना ने एक दफा फिर सवाल खड़े करते हुए उपायुक्त रोपड़ को पत्र लिखकर उक्त उद्योग के प्रदूषित पानी का जल्द उचित बंदोबस्त करने की मांग उठाई है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं अतिरिक्त उपायुक्त ऊना ने डीसी रोपड़ को लिखी चिट्ठी में साफ तौर पर लिखा है कि नया नंगल के केमिकल उद्योग पीएसीएल से जो प्रदूषित पानी जमीन में जाता है, उससे साथ लगते हिमाचल के गांवों बीनेवाल तथा मलूकपुर में लगे सरकारी एवं निजी कुंओं/नलकूपों का पानी भी पूरी तरह से प्रदूषित हो गया है। इनका पानी अब न तो पीने लायक रहा है, और न ही यह सिंचाई के काम आ रहा है। जहां तक कि सनोली में लगाई गई सिंचाई परियोजना भी इसी वजह से पिछले कई सालों से बंद करनी पड़ी है। उक्त गांवों के लोगों की इस गंभीर समस्या को जिला परिषद की बैठकों में जोर शोर से उठाया गया, जिस के मद्देनजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बीनेवाल तथा मलूकपुर गांवों में जाकर अलग-अलग स्थानों से पानी के सैंपल एकत्र करके विभाग की लैब में परीक्षण करवाया था, जिसमें उक्त सैंपल फेल पाए गए थे। पानी में तय पैरामीटर से कहीं ज्यादा सोडियम की मात्रा पाई गई थी। उपायुक्त रोपड़ को लिखी चिट्टी में एडीएम ऊना ने लिखा है कि उक्त गांवों में पानी की गुणवत्ता सही नहीं है। पत्र में डीसी रोपड़ से गुजारिश कर उक्त प्लांट के प्रदूषित पानी के निष्पादन के उचित प्रबंध करने को कहा गया है।
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विधानसभा में भी गूंजा था मुद्दा: रायजादा
ऊना सदर से कांग्रेरस विधायक सतपाल रायजादा ने कहा कि उक्त मसले को उन्होंने गत दिनों विधानसभा में भी उठाया था, जिसका राज्य के सीएम कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं।

जिप सदस्य पंकज सहोड़ ने उठाया है मसला
जिला परिषद रायपुर सहोड़ां वार्ड दस के सदस्य पंकज सहोड़ ने सर्वप्रथम इस गंभीर मसले को जिप बैठकों में उठाया था, जिसके चलते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरकत में आया था, और पानी के सैंपल लिए थे। जिससे यह साफ हो पाया कि उक्त गांवों का पानी पीने एवं सिंचाई के लायक भी नहीं रहा है। उन्होंने का कहा कि प्रदूषण से सरहदी क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक हो गई है।
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प्रदूषण विभाग पहले ही दे चुका है अपनी रिपोर्ट: एसडीओ
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ऊना के एसडीओ एसके धीमान ने कहा कि विभाग पहले ही अपनी रिपोर्ट दे चुका है। उक्त गांवों में पानी पीने लायक तो रहा ही नहीं, सिंचाई के योग्य भी नहीं रहा है। इस बाबत सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हिमाचल प्रदेश को भी अवगत करवा चुके हैं।
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