ऊना।
जिला में डेंगू के बढ़ रहे कहर के बाद बकरी के दूध की मांग बढ़ गई है। बकरी का दूध लोगों की मांग पर अब पशुपालक मुंह मांगे दामों पर बेच रहे हैं। जिला में बकरी के दूध को लोग डेंगू से बचाव के लिए इस्तेमाल में ला रहे हैं। वहीं, अपने रिश्तेदारों को भी बकरी का दूध भेज रहे हैं।
बकरी के दूध का सेवन डेंगू ठीक करने में फायदेमंद बताया जा रहा है। बाहरी राज्यों में बसे हिमाचली लोग भी ग्रामीण क्षेत्रों से बकरी के दूध की डिमांड कर रहे हैं। इससे इसकी खरीद पर सीधा असर पड़ा है। लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी के दूध की तलाश करते देखा जा सकता है। लोगों का कहना है कि आज के समय में बकरी का दूध मिलना आसान नहीं है। इसके लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
पशुपालक इसकी आड़ में चांदी कूट रहे हैं। जिला में अब तक दर्जनों मामले डेंगू पीड़ितों के सामने आ चुके हैं। इससे लोगों में भी हड़कंप मचा हुआ है। ज्यादातर मामलों में लोग बाहरी राज्यों में ही डेंगू की चपेट में आए हैं। लोगों की मानें तो यह देसी नुसखा डेंगू से निपटने के लिए रामबाण है।
आयुर्वेद विभाग के अनुसार डेंगू होने पर बकरी का दूध, पपीता, हरी दूब, बिल्व पत्र का रस भी फायदेमंद माना जाता है। इनके रस में डेंगू से लड़ने की क्षमता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सुभाष गौतम ने कहा गिलोय का रस पीने से भी प्लेटलेट्स बढ़ते हैं। अगर डेंगू पीड़ित पपीते और बिल्व पत्र का जूस अनार के दोनों के साथ मिलाकर पीए तो उनको लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि लोग डेंगू में बेशक बकरी का दूध इस्तेमाल करते हैं लेकिन कोई वैज्ञानिक मान्यता नहीं है।