मैहतपुर (ऊना)।
राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में कूड़ा-कचरा प्रबंधन के लिए खजाना लुटा रही हैं। योजना को धरातल पर जिस संजीदगी से लागू करवाने के प्रयास हो रहे हैं, उसे देखकर प्रतीत होता है कि अगले कुछ सालों में ऊना की पंचायतें चकाचक हो सकेंगी। अभी तक जो पंचायतें योजना से नहीं जुड़ पाई हैं, उन पंचायत प्रतिनिधियों को योजना का लाभ लेने के लिए आगे आना होगा। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी राजेंद्र गौतम की मानें तो अभी तक जिला की कुल 234 पंचायतों में से 75 पंचायतें योजना से जुड़ चुकी हैं। 2014-15 में 20 पंचायतें योजना से जुड़ीं थी जबकि 2015-16 में पांच पंचायत प्रति विकास खंड के अनुपात में नई जुड़ीं। 2016-17 में 30 पंचायतें अर्थात छह पंचायतें प्रति विकास खंड इस योजना में जुड़ गईं।
योजना में कई नई पंचायतों को जोड़ा जाएगा। जिन पंचायतों के आवेदन डीआरडीए के पास पहुंच चुके हैं, उन्हें चालू वित्त वर्ष में योजना से जोड़ दिया जाएगा। ऊना विकास खंड में ठोस एवं तरल कूड़ा-कचरा प्रबंधन योजना में अब तक अजौली, पनोह, कोटलाकलां, कोटला खुर्द, झलेड़ा, बटूही, मलूकपुर, सासन, उदयपुर, कुठार खुर्द, टब्बा, बहडाला, जखेड़ा, रैंसरी, लोअर देहलां शामिल है।
डीसी यूनस ने रायपुर सहोड़ां को मंजूर किए थे 20 लाख
जिला की सरहदी पंचायत रायपुर सहोड़ां के लिए अरसा डेढ़ साल पूर्व तत्कालीन उपायुक्त यूनस ने 20 लाख की धनराशि स्वीकृत की थी लेकिन अभी तक पंचायत का नाम डीआरडीए की फेहरिस्त से गायब है। जिप सदस्य पंकज सहोड़ ने कहा कि उन्होंने खुद पंचायत का नाम परियोजना में डलवाया था लेकिन रायपुर सहोड़ां को क्यों शामिल नहीं किया गया, यह पता नहीं।
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला ग्रामीण विकास परियोजना अधिकारी राजेंद्र गौतम ने कहा कि पंचायत का नाम आने से पूर्व राज्य सरकार से स्वीकृति मिल चुकी थी, जिस कारण बीते वित्त वर्ष में उक्त पंचायत को शामिल नहीं किया जा सका। कहा कि इस वित्तीय वर्ष में उसे शामिल कर लिया जाएगा।