मैहतपुर (ऊना)।
जिला के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे अरसे से बंद पड़े उद्योगों पर महकमे का शिकंजा कसते ही तकरीबन 60 फीसदी उद्यमियों ने अपने उद्योगों को फिर से चलाने की हामी भर दी है। कई उद्योगपतियों ने तो फिर से काम करने की बात उद्योग विभाग के समाने कबूल कर ली है।
हालांकि जिन सात दर्जन उद्योगपतियों को उद्योग विभाग ने नोटिस थमाए थे, उनमें से 40 फीसदी उद्योगपतियों ने अभी तक विभाग के नोटिस पर संजीदगी नहीं दिखाई है और न ही विभाग को बंद पड़े उद्योगों को चलाने या न चलाने को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। पिछले दिनों प्रदेश उच्च न्यायालय का हवाला देकर उद्योग विभाग ने ऐसे उद्योगों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है जिनमें लंबे अरसे से कोई काम नहीं हो रहा है और जो अपने यूनिटों को महज आवास के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उद्योग विभाग ने ऐसे 85 उद्योगपतियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था कि क्यों न उनके प्लॉट का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाए।
अकेले मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्र में ही दो दर्जन से ज्यादा ऐसे उद्योगपतियों को उद्योग विभाग ने नोटिस भेजे थे। यहां लंबे समय से न कोई उत्पादन हो रहा है और न ही ये उद्योग किसी को रोजगार मुहैया करवा रहे हैं। स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र में अभी भी कई ऐसे यूनिट हैं जहां कई सालों से कोई काम-धंधा नहीं हो रहा है जबकि लंबे-चौड़े प्लॉट अलॉट करवा उन पर कुंडली मार कर बैठे हैं।
60 फीसदी उद्योगपतियों ने दिया नोटिस का जवाब : धीमान
जिला उद्योग महाप्रबंधक अंशुल धीमान ने कहा कि अभी तक 60 फीसदी उद्योगपतियों ने ही नोटिस का जवाब दिया है और अपने उद्योग चलाने की इच्छा जताई है। 40 फीसदी उद्योगपतियों का अभी भी जवाब नहीं आया है। साफ है कि वे अपने उद्योग चलाने के हक में नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन उद्यमियों ने काम शुरू करने की बात कही है, उन उद्योगों का निरीक्षण किया जाएगा उसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी।