भरवाईं (ऊना)। पारा बढ़ने के कारण चिंतपूर्णी क्षेत्र की उठाऊ पेयजल परियोजनाओं में पानी की कमी होने लगी है। उठाऊ पेयजल परियोजनाओं में पानी की कमी से क्षेत्र के कई गांवों में पेयजल की किल्लत होने लगी है। आने वाले पखवाड़े में यही हालात रहे तो पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर सकती है। पानी की ज्यादा खपत और पारंपरिक जल स्रोतों का न के बराबर उपयोग और खड्डों में हो रहे अवैध खनन से समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।
चिंतपूर्णी क्षेत्र की बेल्ट में पेयजल की समस्या से करीब 14 पेयजल परियोजनाओं में पानी की कमी दर्ज की गई है। जो पंप मोटरें दिन-रात 12 से 14 घंटे चलती थीं, वो सिर्फ छह से आठ घंटे ही चल रही हैं। हालांकि, यहां पारंपरिक जल स्रोतों की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद इस मौसम में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। इस कारण यह भी है कि क्षेत्र के लोग मात्र आईपीएच विभाग की सप्लाई पर ही निर्भर हो गए हैं।
क्षेत्र के जवाल, करजरी, गिंडपुर मलौण, बधमाणा खड्ड, धर्मसाल महंता, अमोकला प्रीतम, लोहारा और टकोली खड्ड में अवैध खनन से पानी लेवल कम हो रहा है। इससे उठाऊ पेयजल परियोजनाओं भी प्रभावित हो रही हैं। कई जगहों पर पेयजल स्रोतों के प्रदूषित होने से भी पानी की समस्या पेश आ रही है। चिंतपूर्णी के नारी और जवाल में सीवरेज के गंदे पानी से कई स्रोतों का पानी पीने योग्य नहीं रहा है।
ग्रामीणों को गर्मी के मौसम में पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। दो दिन पहले हुई बारिश होने के कारण ऐसा आभास दिखा कि हालात काबू में आ जाएंगे, लेकिन तापमान में फिर से बढ़ोतरी होने से समस्या पेश आ रही है।
आईपीएच विभाग के कनिष्ठ अभियंता नीरज कुमार का कहना है कि विभाग के प्रयासों के चलते क्षेत्र में अब तक पेयजल सप्लाई सुचारु चल रही है। जिन क्षेत्रों में कहीं दिक्कत पेश आ रही है, वहां पर विभाग त्वरित कार्रवाई कर रहा है।