ऊना। कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रही आठ वर्षीय शीतल के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय जिला प्रशासन ने उसकी मदद की फाइल ही दबा कर रख दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय से आदेश पत्र आने के बावजूद पांच माह बीत जाने पर भी प्रशासन ने मासूम के इलाज को लेकर कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है, जिसकी वजह से कैंसर पीड़िता का पिता बच्ची के इलाज को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर है। डॉ. भीमराव अंबेडकर सुरक्षा एवं उत्थान सोसायटी ने वीरवार को एमसी पार्क ऊना में बैठक कर इस मामले पर चिंता जताई और बच्ची के उपचार को लेकर मदद की गुहार लगाई है। सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट रमेश शास्त्री ने बताया कि कैंसर पीड़िता का पिता देसराज निवासी बैहल्ली मोहल्ला अपनी बेटी का उपचार करवाने में लाचार और बेबस है। देसराज मोहल्ले के लोगों से जैसे-तैसे लोगों से आर्थिक सहायता और उधार लेकर पीजीआई चंडीगढ़ में अपनी बेटी का उपचार करवा रहा है। रमेश शस्त्री ने बताया कि पीड़ित परिवार ने बच्ची के इलाज के लिए भारत सरकार से अर्थिक मदद मांगी थी। जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय से मार्च माह में आर्थिक स्वीकृति के लिए जिला प्रशासन को सूचित किया गया था। लेकिन आज दिन तक प्रशासन की ओर से बच्ची के उपचार को आर्थिक स्वीकृति देने के लिाए कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीड़िता का पिता इसके लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर है। लेकिन पीड़िता की फाइल एक टेबल से दूसरे टेबल पर ही घूम रही है। हाल ही में डाक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता को कैंसर 76 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। संस्था ने जिला प्रशासन से इस बाबत जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।
बच्ची की करेंगे हर संभव मदद : डीसी
उपायुक्त विकास लाबरू का कहना है कि उनके ध्यान में इस तरह का मामला नहीं था। अगर ऐसा हुआ है तो मामले की छानबीन की जाएगी। प्रशासन और सरकार दुसाध्य बीमारियों से पीड़ित लोगों की मदद को वचनबद्ध है। प्रशासन अपने स्तर पर भी हर संभव मदद करने को तैयार है।