भरवाई(ऊना)।
चिंतपूर्णी अस्पताल की पोल उस समय खुल गई जब चिंतपूर्णी बाईपास के समीप सड़क हादसे के बाद घायल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में हर ओर घायलों की चीख-पुकार सुनने को मिल रही थी। चिंतपूर्णी के अस्पताल में मात्र एक चिकित्सक तैनात है और 18 घायलों को एक साथ उपचार देने के लिए उसको कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा।
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी खूब खली लेकिन फिर भी इकलौते चिकित्सक ने घायलों को सेवाएं दीं। अस्पताल में आलम था कि एक के बाद एक घायल इमरजेंसी कक्ष में लाया जा रहा था। अस्पताल में रोगियों को लिटाने के लिए जगह तक नहीं बची। घायलों को व्हीलचेयर, स्ट्रेचर भी कम पड़ गए। घायल नीचे फर्श पर तड़पते दिखे। चिकित्सक सेवाएं देने में असमर्थ दिख रहा था। ऐसे में लोगों ने अस्पताल प्रशासन की मदद की।
अस्पताल में पिछले लंबे समय से चिकित्सकों और स्टाफ की कमी चल रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इस पर कभी ध्यान नहीं दिया। इसका खामियाजा घायलों और रोगियों को उठाना पड़ रहा है। अस्पताल में एक दर्जन भर गांवों के लोग इलाज के लिए आते हैं। हादसे में घायल लोगों को अस्पताल में तैनात डॉक्टर अमित और स्टाफ नर्स ने मौके पर जिस तरह से उपचार किया, उसकी सराहना हो रही है। हालांकि चिंतपूर्णी में बाहरी राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में अस्पताल की लचर व्यवस्था और कम स्टाफ की भी हर ओर आलोचना हो रही है।
सीएमओ ऊना डॉ. प्रकाश दड़ोच ने कहा कि चिंतपूर्णी अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी है। उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार को कई बार लिखा है। बस हादसे में घायल लोगों का सही ढंग से इलाज किया गया।