अमर उजाला ब्यूरो
दुलैहड़ (ऊना)। आलू की फसल की उचित कीमत न मिलने के चलते किसानों ने निर्धारित समय होने के बाद भी आलू की फसल की पिटाई रोक दी है। किसानों को आलू की फसल की कीमत 3.40 रुपये प्रति किलो मिल रही है।
अगर किसान आलू की फसल की पिटाई करते हैं तो पैदावार की कीमत से दिहाड़ीदारों की मजदूरी भी नहीं निकलेगी। इसके चलते किसान फसल की पिटाई न करने का फैसला लिया है। इसके चलते किसानों की करोड़ों की आलू की फसल खेतों में ही सड़ रही है। दो महीने में तैयार होने वाली आलू की फसल की बिजाई किसान सितंबर के अंतिम सप्ताह में करना शुरू कर देते हैं। लेकिन उचित भाव न मिलने के कारण कुछ किसानों ने अभी तक भी आलू की फसल की पटाई नहीं की है। इससे करोड़ों की आलू की फसल अभी भी मिट्टी में सड़ रही है। निर्धारित समय में अगर आलू की फसल की पिटाई न की जाए तो आलू मिट्टी में ही फटना शुरू हो जाता है। उसे कीड़ा की नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है।
आलू उत्पादक होशियार सिंह, गुरनाम सिंह, सोहन लाल, रौनक लाल, पवन सैणी, जगतार सिंह, रामपाल, प्यारा लाल ने कहा कि कीमत न मिलने के कारण क्षेत्र के कई किसानों ने अभी तक आलू की फसल की पटाई नहीं की है। उन्होंने बताया कि जिला में अभी भी 40 प्रतिशत आलू की फसल खेतों में ही है। इसकी अभी तक पटाई होना बाकी है।
2400 हेक्टेयर में होता है आलू
हर साल जिले में दो बार आलू की फसल की पैदावार होती है और 2200 से 2400 हेक्टेयर भूमि में बिजाई की जाती है। इसके साथ प्रति हेक्टेयर भूमि में 120 क्विंटल आलू की पैदावार होती है। जिले में करीब 10 करोड़ रुपये का आलू उत्पादन होता है। आलू की पैदावार को प्रदेश सहित दिल्ली, चंडीगढ़, होशियारपुर, लुधियाना सहित अन्य राज्यों की मंडियों में बेचा जाता है। किसानों को आलू की फसल के मूल्य 3.40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रहे है। इससे किसानों ने फसल की पटाई की रोक दी है।
20 दिसंबर तक रोकी पटाई
किसानों ने आलू की फसल की पटाई कम कीमत मिलने के कारण 20 दिसंबर तक रोक दी है। किसानों ने उम्मीद जताई है कि 20 दिसंबर के बाद आलू की फसल के भाव बढ़ सकते हैं। इसके चलते किसान आलू की फसल में जितना हो सकते उतना घाटे को कम करने की कोशिश में लगे हैं।
मंडी में बेचे आलू : सुरेश
कृषि उपनिदेशक डॉ. सुरेश कपूर ने बताया कि किसान आलू की फसल को व्यापारियों को बेचने की बजाय मंडी में बेचें। मंडियों में कृषि विभाग के मार्केटिंग सदस्य मौजूद होते है और वह जितना हो सके किसानों को फसलों की उचित दाम दिलाएंगे।