खुद को पवित्र, नदियां अपवित्र कर जाते हैं लोग
बैसाखी के बाद का सच, पर्व के बाद पवित्र सरोवर में फैला कचरा
स्नान के बाद कपड़े और अन्य सामान फेंका, जल प्रदूषण की वजह बनी आस्था की डुबकी
राज्य सरकार इस दिशा में उठाएगी उचित कदम: कंवर
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)।
बैसाखी पर्व हो गया। पवित्र जल सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाकर श्रद्धालुगण भले ही खुद को पवित्र कर गए हों लेकिन नदियों-सरोसरों में कचरा फेंक गए। इन नदियों-सरोवरों को अपवित्र कर गए हैं। बैसाखी के बाद नदियों और पवित्र सरोवरों का जायजा लेने के बाद देखा गया कि लोगों ने सरोवरों में स्नान के बाद अपने अधोवस्त्रों तक को फेंक दिया है। सरोवरों के स्वच्छ घाटों पर जहां सफाई रखनी चाहिए थी, वहां लोगों ने गंदगी के ढेर लगा दिए हैं। इन जल सरोवरों के घाटों पर फेंका कचरा स्वच्छ निर्मल जल को प्रदूषित करने की बहुत बड़ी वजह बनता जा रहा है। कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के तहत पवित्र ब्रह्मोति घाट से लेकर पंजाब के बभौर साहिब घाट, स्वामी रामानंद आश्रम घाट, बाबा उधो मंदिर घाट, वरुण देव मंदिर घाट, लक्ष्मी नारायण मंदिर घाट और गुरुद्वारा घाट साहिब पर बैसाखी के बाद पुराने कटे-फटे कैलेंडर, पुराने कपड़ों, पुरानी तस्वीरों, खंडित हो चुकी मूर्तियों तथा अनेक प्रकार के सामान से भर गए हैं। ब्रह्मोति और बभौर साहिब घाट पर आस्था की डुबकी लगाने वाले लोगों ने सरोवरों के पानी को अपने वस्त्रों व अन्य कचरा फेंककर पूरी तरह से अपवित्र करने का काम किया है। पर्यावरण प्रेमी डॉ. सतवीर सिंह ने कहा कि सरोवरों के घाटों पर सामान या कचरा फेंकने पर रोक लगाई जानी चाहिए। जागृति संस्था के अध्यक्ष प्रभात भट्टी ने कहा कि पंजाब एवं हिमाचल सरकार को इन सरोवरों की पवित्रता को बरकरार रखने के लिए समय रहते कदम उठाने होंगे।
सूबे के उद्योग, पशुपालन एवं मत्स्य पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि लोगों को इस बात के लिए जागरूक करना होगा, तभी यह संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में उचित कदम उठाएगी।