बसदेहड़ा पीएचसी 34 साल बाद बनी सीएचसी
लोगों की मांग पर सीएम ने लगाई मुहर; बीएमओ मिलने से बढ़ेगा स्टाफ, मिलेंगी सुविधाएं
1937 में खुली थी डिस्पेंसरी, 1984 में मिला था पीएचसी दर्जा
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)।
34 साल का लंबे इंतजार के बाद आखिर पंडित रामकृष्ण भारद्वाज मेमोरियल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बसदेहड़ा को सीएचसी का दर्जा मिल ही गया। जब भी प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री ऊना के दौरे पर आया तो क्षेत्र से यही मांग उठती थी कि पीएचसी बसदेहड़ा को सीएचसी का दर्जा किया जाए। शनिवार को चैत्र नवरात्रों में मैहतपुर जनसभा में मौजूदा सीएम जयराम ठाकुर ने पीएचसी को सीएचसी बनाने की बड़ी घोषणा करने के साथ ही बसदेहड़ा में ही बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) बैठाने का भी एलान कर न केवल क्षेत्र के लोगों की एक अरसा पुरानी मांग को पूरा किया बल्कि दर्जनों गांवों की डिस्पेंसरियों के कर्मचारियों को भी राहत दी है। इनमें तैनात चिकित्सा स्टाफ को अब हरोली जाकर अपने आवश्यक कार्य नहीं करवाने पड़ेंगे। बीएमओ के बैठने से न केवल मेडिकल स्टाफ में वृद्धि होगी बल्कि क्षेत्र की जनता को 24 घंटे चिकित्सा सुविधाएं भी मिल सकेंगी। 1937 में बसदेहड़ा निवासी पंडित रामकृष्ण भारद्वाज ने लाहौर में रहते हुए अपने सहयोगी जनों की मदद से इस स्वास्थ्य केंद्र की बुनियाद रखी थी। 1984 में इसे पीएचसी बना दिया गया लेकिन फिर किसी ने इस पीएचसी की ओर मुड़कर नहीं देखा। भाजपा सरकार के सत्ता काल में हालांकि पुराने भवन को हटाकर नया भवन बनाया गया लेकिन क्षेत्र की मांग इसे सीएचसी बनाने की थी। कुछ साल साल स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए यहां 24 घंटे प्रसूति सुविधा भी मुहैया करवाई लेकिन बाद में वह भी बंद कर दी गई।
सीएम जयराम ठाकुर ने इस मांग को पूरा कर अरसे से उठ रही मांग को पूरा कर क्षेत्र की जनता को खुशी दी है। बसदेहड़ा में सीएचसी बनाए जाने की सीएम की घोषणा आम जनता के साथ-साथ क्षेत्र की पंचायतों में चल रहे स्वास्थ्य केंद्रों के मेडिकल स्टाफ को बहुत बड़ी राहत देने वाली है। इस मौके पर नगर परिषद अध्यक्ष मंजू चंदेल, सुरेंद्र मोहन भारद्वाज समेत नगर परिषद के समस्त पार्षदों ने सीएम जयराम ठाकुर का आभार जताया है।