अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। शिक्षा विभाग की ओर से अप्रैल की छुट्टियों के कारण कई प्राथमिक स्कूलों में खतरा मंडरा सकता है। विद्यार्थियों की कम संख्या के चलते कई प्राइमरी स्कूलों को सरकार बंद कर चुकी। कम संख्या से जूझ रहे स्कूल भी अब दाखिलों के समय छुट्टियां होने के कारण रेड जोन में आ सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार 10 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों को भी बंद करने पर सरकार चर्चा कर रही है। इसके चलते शिक्षक संघ भी नए सत्र में दाखिलों के समय होने वाली छुट्टियों के खिलाफ हैं। शिक्षकों के अनुसार अगर अप्रैल में नए सत्र के शुरू होने पर दाखिलों के समय ही छुट्टियां होंगी तो इसका पूरा लाभ निजी स्कूल उठा लेंगे।
इसका खामियाजा शिक्षा विभाग को सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की कम संख्या होने के रूप में उठाना पड़ सकता है। दूसरी ओर मार्च में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं का वार्षिक परिणाम के घोषित होने में देरी हो सकती है। जिन दिनों शिक्षकों ने बोर्ड परीक्षाओं के पेपर चेक करने होते हैं उन दिनों में तो शिक्षा विभाग की छुट्टियां होगी तो बोर्ड परीक्षा परिणाम देरी से घोषित होंगे। वहीं, प्री प्राइमरी योजना पर भी अप्रैल की छुट्टियां पानी फेर सकती हैं। निजी स्कूलों में दाखिलों की संख्या में बढ़ोतरी के लिए निजी स्कूलों के शिक्षक फील्ड में उतर चुके हैं। वे लोगों को निजी स्कूलों में बच्चों को दाखिल करने के लिए प्रलोभन दे रहे हैं।
हो सकता है पुनर्विचार
शिक्षा विभाग अप्रैल की छुट्टियों पर पुनर्विचार कर सकता है। शिक्षा विभाग की ओर से दोबारा से इस संबंध में उच्चतर, प्राथमिक और निरीक्षण शिक्षा उपनिदेशक सहित शिक्षक संघों से पूर्ण विचार रिपोर्ट मांगी है। इससे छुट्टियों के संबंध में दोबारा से चर्चा की जा सके।
एक बार भेजी जा चुकी है रिपोर्ट : अवतार
उच्चतर शिक्षा अधीक्षक ग्रेड-1 अवतार सिंह ने कहा कि शिक्षा विभाग को उपनिदेशक कार्यालय से सुझाव रिपोर्ट एक बार भेज दी गई है। छुट्टियों पर पुनर्विचार के लिए दूसरी बार मांगी रिपोर्ट के लिए सोमवार को शिक्षकों के सुझाव लिए जाएंगे और चर्चा की जाएगी।