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कुटलैहड़ की वन संपदा खतरे में

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अमर उजाला ब्यूरो

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बंगाणा (ऊना)।
कुटलैहड़ विस क्षेत्र में करोड़ों रुपये की वन संपदा खतरे में है। कुटलैहड़ के जंगलों में वन माफिया धड़ल्लेे से हरे पेड़ों पर बेरोकटोक कुल्हाड़ी चला रहा है। खैर के इस अंधाधुंध अवैध कटान पर शिकंजा कसने को वन विभाग की ढील पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुटलैहड़ हलके की रामगढ़ धार, सोलहसिंगी धार और बीबीएमबी के अधीन जंगलों में साल दर धर साल बेशकीमती पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है। कभी हरे भरे दिखने वाले घने जंगल अब खत्म होते जा रहे हैं।

बीते दिनों प्रदेश भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनकर जिला पहुंचने वीरेंद्र कंवर ने कुटलैहड़ के जंगलों में अवैध कटान पर चिंता जताई थी और माफिया पर शिकंजा कसने के निर्देश दिए। हाल ही में भरमौत व परोइयां के जंगलों में खैर के अवैध पेड़ों के कटान मामले से भी लोगों में हड़कंप मच गया। यहां वन काटुओं ने धल्लड़े से कटान कर खैर के पेड़ों को जड़ों समेत उखाड़ डाला।
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इससे लाखों रुपये की वन संपदा का नुकसान हुआ। लोगों में सूरम सिंह, मदन लाल, करतार सिंह, सतीश कुमार, जोगिंद्र सिंह, शक्ति चंद, रामपाल, राजीव कुमार, जगत ने जंगल में हो रहे कटान को लेकर विभाग संजीदा नहीं है। लोगों ने सरकार से जंगलों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है ताकि वन संपदा को बचाया जा सके। एसीएफ जगदीश गौतम का कहना है कि जंगलों की सुरक्षा के लिए वन टीमों का गठन किया गया है। टीमें नियमित जांच कर रही हैं।

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