अंब (ऊना)। निजता को मौलिक अधिकार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुस्लिम समुदाय ने स्वागत किया है। लेकिन आधार कार्ड के लिए फिंगरप्रिंट और रेटीना की स्कैनिंग को समय की मांग बताते हुए इसके विरोध को सिरे से खारिज किया है। तीन तलाक के मुद्दे पर भी मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों की ओर से इसका जबरदस्त स्वागत किया गया है। हिमाचल प्रदेश गुज्जर कल्याण बोर्ड के सदस्य एवं कांग्रेसी नेता नियामत अली ने निजता के अधिकार और तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सराहनीय बताते हुए कहा कि किसी महिला को नाजायज और बेवजह तलाक देने की तीन तलाक की प्रथा उनकी नजर में सही नहीं थी। उन्होंने निजता को मौलिक अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि यह स्वागत योग्य है। हालांकि आधार कार्ड जैसी विकासात्मक और बुनियादी सेवाओं के लिए फिंगरप्रिंट और रेटीना की स्कैनिंग निजता का हनन नहीं है। त्याई के रफी मोहम्मद उर्फ मौला का कहना है कि तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। इस प्रथा की शिकार अगर हमारी अपनी बेटी हो तो उसका क्या बनेगा? यह पीड़ित का दिल ही जानता है। अंब के साहिल उर रहमान और मेहरदीन का कहना है कि निजता को हर व्यक्ति अपना मौलिक अधिकार मानता है। लेकिन, आधार कार्ड जैसी सेवाओं के लिए आवश्यक कार्यवाही समय की मांग है। इससे निजता के हनन जैसी कोई बात सामने नहीं आती है।