शाम ढलते ही एनएसएस कैंप से गायब हो जाते हैं स्वयंसेवी
सरकारी राशि का हो रहा गोलमाल, एनएसएस शिविर में नियमों की उड़ रही धज्जियां
खामियां पाई जाने पर होगी सख्त कार्रवाई: अमरजीत
अमन वर्मा
ऊना। प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों में चल रहे एनएसएस शिविर के लिए मिलने वाली राशि में हजारों का गोलमाल हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक स्कूलों और कॉलेज में लगने वाले सात दिवसीय एनएसएस शिविर में स्वयंसेवियों को मिलने वाले रात के बजट में गोलमाल किया जा रहा है। ऐसे में विभाग की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि अधिकांश स्कूलों और कॉलेजों में शाम ढलते ही स्वयंसेवियों को घर भेज दिया जाता है।
ऐसे में स्वयंसेवियों को रात का भोजन नहीं दिया जा रहा है। स्वयंसेवियों को मात्र सुबह और दोपहर का भोजन ही दिया जाता है, जबकि विभाग की ओर से एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर में स्वयंसेवियों के लिए सुबह, दोपहर सहित रात के भोजन का भी बजट दिया जाता है। गौर हो कि स्कूलों में लगने वाले एनएसएस शिविर में 50 स्वयंसेवियों के लिए 30 हजार रुपये का वार्षिक बजट, जबकि 22 हजार 500 रुपये विशेष शिविर के लिए और कॉलेज में लगने वाले एनएसएस के विशेष शिविर के लिए करीब 85 हजार का वार्षिक और कैंप के लिए 45 हजार रुपये का बजट का प्रावधान है। विभाग की ओर से शिविर की जांच करने के लिए एक कमेटी भी गठित की गई है, लेकिन विभागीय अधिकारी भी इक्का-दुक्का स्कूलों में दिन के समय जांच कर मात्र कागजी कार्रवाई पूरी कर रहे हैं। वहीं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी भी नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। उधर, उच्च शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा का कहना है कि नियमानुसार सात दिवसीय एनएसएस शिविर में स्वयंसेवियों को 24 घंटे शिविर में रखा जाता है। ऐसी बात सामने आ रही है कि शाम को स्वयंसेवियों को घर भेज दिया जाता है तो आगे से निरीक्षण किया जाएगा, यदि कहीं पर कोई खामी पाई जाती है तो उक्त स्कूल/कॉलेज के अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशक ने कहा कि इस बारे में शिक्षा उपनिदेशकों को भी एनएसएस शिविरों की गतिविधियों की पूरी रिपोर्ट भेजने एवं स्कूलों में शाम के समय स्वयंसेवी न पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश दिए जाएंगे।