अंब(ऊना)।
क्षेत्र में विभिन्न पंचायतों में तैनात जल रक्षकों को मानदेय का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। जल रक्षकों को पहले छह साल सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग कह ओर से मानदेय दिया जाता था। सितंबर-अक्तूूबर 2017 में आईपीएच के बजाय जिला परिषद की तरफ से जल रक्षकों को मानदेय दिया गया। स्थानीय ग्राम पंचायतों की प्रस्ताव डाले जाने पर जल रक्षकों का मानदेय पंचायत के माध्यम से उन्हें प्रदान किया जाता था।
पिछले छह माह से न तो आईपीएच और न ही जिला परिषद ने पंचायतों से ऐसे किसी प्रस्ताव की मांग की गई है। इस कारण जल रक्षकों को अभी तक मानदेय नहीं मिलने के कारण आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में जल रक्षकों को चार घंटे काम के लिए 1700 रुपये मानदेय दिया जाता है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद जल रक्षकों को उम्मीद थी कि भाजपा सरकार जल रक्षकों के लिए कोई नियमित पॉलिसी लाएगी।
इसके उलट उन्हें मानदेय के भी लाले पड़ गए हैं। जल रक्षकों संजीव कुमार शर्मा, राकेश कुमार, सतीश कुमार, यशपाल, अरविंद और मनोज आदि का कहना है कि पंचायतों से न तो आईपीएच और न जिला परिषद से मानदेय संबंधी कोई प्रस्ताव मंगवाया गया है। इसका नतीजा है कि छह माह से जल रक्षक फाके करने को मजबूर हैं। विभाग के एसडीओ पंकज धीमान ने बताया कि गत वर्ष मार्च माह तक जल रक्षकों का मानदेय प्रदेश सरकार की तरफ से दिया जाता था। जिसे बाद में ब्लॉक से दिया जा रहा है।