अमर उजाला ब्यूरो
थानाकलां (ऊना)। मेले और त्योहार भाईचारे के प्रतीक हैं। इस तरह के आयोजन सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में सहायक होते हैं। इसलिए सांस्कृतिक विरासत को बचाकर रखना हमारा धर्म ही नहीं परम कर्तव्य है। ये बात जिला स्तरीय पिपलू मेले के शुभारंभ पर मुख्य अतिथि ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पशु एवं मत्स्य पालन मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कही।
इससे पहले उन्होंने झंडा रस्म और पूजा अर्चना की। उन्होंने कहा कि तीन जिलों का संगम स्थल पिपलू मेला व्यक्ति विशेष न होकर तीनों जिलों के लोगों का संगम स्थल है। मेला सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक है। पूर्व मंत्री प्रवीण शर्मा ने कहा कि असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाएं, तभी इसकी सार्थकता साबित होगी। उन्होंने कहा कि जहां मेले में बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े एवं महिलाएं जरूरत के अनुसार सामान खरीदने में रुचि रखते हैं, वहीं व्यापारी भी इस दिन का इंतजार करते हैं। उन्होंने मेला कमेटी को मेले के सफल आयोजन के लिए बधाई भी दी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के स्टार लोक गायक धीरज शर्मा ने कजो भेडलिया चारदी धारा-धारा, पंछी कूकू बोलदा, फुल्लियाँ करालीं, गोरा-गोरा रंग तेरा समेत कई गानों पर प्रस्तुतियां देकर समा बांधा। स्कूलों के नन्हे कलाकारों ने भी रंग जमाया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रायपुर मैदान की छात्राओं ने वंदे मातरम, पिपलू की छात्राओं ने हरियाणवी गीत, हटली की छात्राओं ने नाटी डालकर मेले का चार चांद लगाए। रामकिशन भट्टी ईसपुर ने गुग्गा गायन, कुसुम कला मंच लदरौर ने समूह नृत्य, रजिया शान ने माए नी मेरिये ऊने दीया राहें पिपलू कितनी क दूर, बद्री की दुल्हिनया, अरुण कुमार समलाड़ा ने ग्रुप डांस, देसराज मोदगिल ने पहाड़ी गानों से पंडाल को झूमने पर मजबूर किया।
वीरेन्द्र कंवर ने पिपलू मेले के उपलक्ष्य पर स्मारिका का विमोचन किया गया। मंच संचालन नरेंद्र धीमान ने किया। इस मौके पर एचआरटीसी उपाध्यक्ष विजय अग्निहोत्री, जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला देवी, एसडीएम बंगाणा संजीव कुमार शर्मा, तहसीलदार बंगाणा शमशेर सिंह, बीडीओ बंगाणा सोनू गोयल समेत अन्य भी उपस्थित थे।