अमर उजाला ब्यूरो
गगरेट (ऊना)। जरा याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर न आए हिंदी फिल्म के गाने की ये लाइनें बहुत से मायने रखती हैं। देश के लिए कुर्बान हो जाना कहने के लिए तो समय नहीं लगता। लेकिन शहीद का परिवार वर्षों तक उसकी कमी महसूस करता है। परिवार को तब फख्र होता है जब शहीद के परिवारवालों को दिल्ली स्थित युद्ध स्मारक बुलाया जाता है।
हाल ही में दिल्ली में वॉर मेमोरियल बनाया गया है। इस स्थान पर हर रोज एक शहीद परिवार को बुलाया जा रहा है। वहां शहीद को श्रद्धांजलि दी जाती है। क्षेत्र के मंधौली गांव की कला देवी ने भी पति प्रेम सिंह को दिल्ली वॉर मैमोरियल में श्रद्धांजलि दी। 1971 के युद्ध के दौरान प्रेम सिंह ने देश की रक्षा करते हुए प्राणों का बलिदान दिया था। शहीद के परिवार को सेना ने दिल्ली अपने खर्चे पर बुलाया गया। पत्नी से शहीद प्रेम सिंह को श्रद्धांजलि दी शहीद प्रेम सिंह के दो बेटे भी सेना में हैं। एक बेटा बतौर लेफ्टिनेंट सेवानिवृत्त हो चुके हैं। देश सेवा से जुड़े इस परिवार को सेना में सेवाएं देने पर गर्व है।
शहीद प्रेम सिंह की पत्नी कला देवी ने कहा कि जाने वाले की कोई कमी पूरी तो नहीं कर सकता, लेकिन देश पर जान देना गर्व का विषय है। सरकार ने वॉर मेमोरियल बनाकर इतने वर्षों बाद भी उन्हें याद किया यह सच्चा सम्मान है।
शौर्य चक्र विजेता कैप्टन सुशील जरियाल ने कहा कि सेना शहीद का सम्मान हमेशा से करती आई है। लेकिन वॉर मेमोरियल पर जाकर शहीद के परिवार द्वारा श्रद्धांजलि देने से शहीद के परिवार के साथ क्षेत्र के लोगों के लिए भी गर्व का विषय है।