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शिमला में 15 को होगी यूनियन के पदाधिकारियों बैठक

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आंगनबाड़ी यूनियन की शिमला में
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निदेशक के साथ बैठक 15 को

बैठक में नर्सरी कक्षाओं की नीति बनाने पर होगी चरचा
आंगनबाड़ी वर्कर्स की मांगों को लेकर भी बनाई जाएगी नीति
अमर उजाला ब्यूरो
अंब (ऊना)। सीटू से संबंधित आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर यूनियन की ओर से अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में प्री नर्सरी की कक्षाएं स्कूलों के बजाय आंगनबाड़ी केंद्रों में चलाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किए थे। इसके बाद अब सरकार ने यूनियन के पदाधिकारियों के साथ 15 जनवरी को निदेशक महिला एवं बाल विकास ने शिमला में बैठक बुलाई है। बैठक में आंगनबाड़ी वर्कर्स की मांगों के बारे में और नर्सरी कक्षाओं के बारे में नीति बनाने को लेकर बैठक बुलाई है। आंगनबाड़ी यूनियन की राज्य प्रधान नीलम जसवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष खिम्मी भंडारी, उपाध्यक्ष सुमित्रा ठाकुर, नीलम, वीना देवी और महासचिव राजकुमारी, सहसचिव सपना ठाकुर, कोषाध्यक्ष हिमी देवी ने इसे यूनियन के संघर्ष की जीत बताया है और सब वर्करों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यूनियन ने विभाग को मांगपत्र भी दिया था और शिक्षा तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री से भी वार्ता की थी। इसमें उन्होंने जल्दी मीटिंग बुलाने का आश्वासन दिया था। उसके बाद 8-9 जनवरी को हुई देशव्यापी हड़ताल में हिमाचल प्रदेश के सभी प्रोजेक्टों में जबरदस्त उत्साह और भागीदारी के साथ सफल हड़ताल हुई है। जिसमें आंगनबाड़ी वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी घोषित करने, न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये देने, पेंशन सुविधा उपलब्ध कराने, आंगनबाड़ी केंद्रों को ही प्री नर्सरी का दर्जा देने, रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष करने और बाल विकास परियोजना के लिए बजट बढ़ाने की मांग की गई। इस हड़ताल को असफल करने के लिए सरकार की ओर से अधिकारियों और कर्मचारियों के माध्यम से वर्करों पर दबाव डाला गया, लेकिन सरकार हड़ताल को रोक नहीं पाई और पहली बार प्रदेश में हजारों वर्करों ने दो दिन की सफल हड़ताल कर एकता का परिचय दिया है।15 जनवरी की बैठक में यूनियन हिमाचल सरकार से बाल विकास परियोजना के लिए बजट बढ़ाने, हरियाणा सरकार के बराबर वर्करों को 11,500 रुपये तथा हेल्परों को छह हजार रुपये मानदेय देने और हरियाणा की तर्ज पर रिटायरमेंट की आयु सीमा 65 वर्ष करने, पेंशन और ग्रेच्यूटी की सुविधा देने, 2013 से लंबित एनआरएचएम के बिलों का भुगतान करने, आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री नर्सरी कक्षाएं चलाने, मिनी आंगनबाड़ी को पूर्ण केंद्र का दर्जा देने और रजिस्टर संख्या 2,3,4,5 केंद्रों में जल्दी उपलब्ध करवाए जाएं।
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