ऊना।
ग्रामीण विकास, पंचायतीराज, पशु एवं मत्स्य पालन विभाग मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि किसानों को देसी नस्ल के गोपालन के साथ-साथ शून्य लागत खेती की तरफ बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि जर्सी और एचएफ नस्ल की गाय वातावरण अनुकूल नहीं है बल्कि इनका दूध देसी नस्ल की गाय के मुकाबले कम आंका गया है। उन्होंने कहा कि खेती में रसायनिक खादों, कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल से खेती प्रदूषित हुई है और मनुष्य कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहा है। उन्होंने किसानों से शून्य लागत खेती अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि गोमूत्र और गोबर से तैयार जैविक खाद खेती के लिए लाभदायक है।
इससे किसानों की आय में तीन से चार गुणा तक वृद्धि संभव है। ऊना स्थित जिला परिषद सभागार में हिमाचल प्रदेश सह-पशु चिकित्सा परिषद की एक दिवसीय संगोष्ठी में उन्होंने पशु पालन विभाग से भारतीय मूल की गाय को बढ़ावा देने पर बल दिया। कार्यक्रम के विशेष अतिथि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि जयराम ठाकुर सरकार गांव, गरीब, किसान, कर्मचारी, पिछडे़ तबके की सरकार है।
पहले बजट में ही समाज के हर वर्ग के उत्थान, कल्याण व विकास की ओर विशेष ध्यान दिया है। हिमाचल सह पशु चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष एवं निदेशक पशुपालन एवं प्रजनन विभाग डॉ. सुदेश चौधरी ने विभाग की विभिन्न जानकारियों के बारे में बताया। संगोष्ठी में पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय पालमपुर के डीन डॉ. मनदीप शर्मा ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होने बताया कि सह-पशु चिकित्सा परिषद पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन, तकनीकों एवं कल्याण की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से 2050 तक अधिकतर एंटीबायोटिक निष्क्रिय हो जाएंगे। कार्यक्रम में डॉ. अमित शर्मा ने पशुओं में बांझपन के निदान की जानकारी दी।
इस अवसर पर डॉ. जय सिंह सेन, डॉ. मनदीप शर्मा, डॉ. आदर्श कुमार, डॉ. आर ठाकुर, डॉ. उपेंद्र कुमार, डॉ. निशांत ठाकुर, पीओ डीआरडीए राजेंद्र गौतम, जिला पंचायत अधिकारी रमण शर्मा, कुटलैहड़ भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोहर लाल, महामंत्री तरसेम लाल, सुभाष राणा, दिनेश नेगी, आशोक धीमान, राम सिंह ठाकुर उपस्थित रहे।