अमर उजाला ब्यूरो
लठियाणी(ऊना)।
बारिश न होने के कारण एक तरफ शुष्क ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, तो दूसरी तरफ किसान परेशान हैं। किसानों ने गेहूं की बिजाई कर रखी है। लेकिन अभी तक बारिश की एक बूंद नहीं टपकी है। ऐसे में किसानों को फसलों के खराब होने की आशंका सताने लगी है।
बारिश न होने से किसानों की चिंता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। किसान एक माह से बारिश के इंतजार में आसमान पर टकटकी लगाए बैठे हैं। किसान खेतों में बीजी गेहूं को लेकर चिंतित हैं। क्षेत्र के किसानों ने गेहूं के बाद आलू के बीज भी लगाए हैं। बारिश न होने से लगाए आलू के बीजों पर भी खतरा मंडराने लगा हैं।
किसानों राज कुमार, अशोक कुमार, कर्म चंद, संजीव कुमार, जोगेंद्र शर्मा, सतीश कुमार, पवन कुमार, प्रकाश चंद, रमेश चंद, सत्या देवी, कांता देवी, व्यासा देवी, प्रीत्तम चंद ने कहा कि यदि एक से दो सप्ताह के भीतर बारिश न होती है, तो गेहूं की फसल की पैदावार पर संकट आ जाएगा। कृषि विभाग बंगाणा के एडीओ जेअंत चिम्मा का कहना है कि इन दोनों फसलों की बिजाई के समय खेत में नमी होना अवश्य है।
लेकिन बारिश न होने के कारण फसलों को नुकसान होना तो लाजमी है। लेकिन शुष्क मौसम और पाले से गेहूं कि फसल को बचाने के लिए एक लीटर पानी में 3 से 5 ग्राम कापर ऑक्सीफलोराइड घोल की स्प्रे करने से एवं आलू के खेतों में क्यारियों की मल्विंग तथा अपने खेतों में सभी प्रकार की फसलों की सुरक्षा के लिए सवाईल मोस्चर मैथड का उपयोग कर सकते हैं।