गगरेट(ऊना)। गगरेट के जंगलों में लगी आग अब रिहायशी इलाकों में भी कहर बरपाने पर उतारू है। शुक्रवार को गगरेट के जंगल में लगी आग की चिंगारी हवा के साथ उड़कर मां चिंतपूर्णी गोशाला ट्रस्ट द्वारा संचालित मां चिंतपूर्णी गोशाला में जा गिरी। गनीमत यह रही कि इससे गोवंश को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन करीब पंद्रह क्विंटल तूड़ी जलकर राख हो गई।
गोशाला संचालकों ने इलाके के गांव-गांव से तूड़ी एकत्रित कर गोशाला में रखी थी। पिछले दो-तीन दिन से गगरेट व इसके आसपास के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। वन विभाग के साथ-साथ अग्निशमन विभाग भी आग के इस तांडव के आगे बेबस है। शुक्रवार को फिर से गगरेट का जंगल अचानक दहक उठा। जंगल के साथ लगते रिहायशी बस्तियों के लोग तो भय में आए ही, बल्कि हवा के झोंके के साथ उड़ी एक चिंगारी सीधा मां चिंतपूर्णी गोशाला में आकर गिरी। उस समय गोशाला के सेवक गो सेवा में लगे हुए थे कि तभी किसी राहगीर ने तूड़ी में आग लगने की सूचना दी। जब तक सेवादार घटनास्थल पर पहुंचते, तब तक तूड़ी से आग की लपटें उठना शुरू हो गईं। हालांकि ग्वालों ने कड़ी मशक्कत के साथ आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक पंद्रह क्विंटल के करीब तूड़ी जलकर राख हो गई थी।
यही नहीं, बल्कि आग बुझाने के चक्कर में पानी डालने के चलते काफी तूड़ी भीगकर भी खराब हो गई। इस अग्निकांड में करीब दस हजार रुपये के नुकसान का अनुमान है। मां चिंतपूर्णी गो सेवा ट्रस्ट के सदस्य शुभम पुरी और हरदीप सिंह ठाकुर ने उपायुक्त ऊना से गोशाला में फायर फाइटिंग सिस्टम स्थापित करवाने के लिए बजट उपलब्ध करवाने की मांग की है।