ऊना। श्रीराधा कृष्ण कोटलाकलां में चल रही भागवत कथा के दौरान कथा दादा दामोदार ने अपने प्रवचनों से संगतों को निहाल किया। उन्होंने कहा कि जीव जब मानव योनि में जन्म लेता है तो उसकी मृत्यु भी साथ में ही जन्म लेती है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा बाल जी का आशीर्वाद लिया। शुक्रवार सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचने शुरू हो गए थे। दोपहर बाद तक श्रद्धालुओं ने घंटों लाइनों में खड़ा होकर बाबा बाल जी का आशीर्वाद लिया। इस दौरान दामोदार दास ने कहा कि मानव को अपनी दिनचर्या कैसे व्यतीत करनी चाहिए, यह शिक्षा हमें प्रभु श्री द्वारिकाधीश जी की गृहस्थ लीला से मिलती है। प्रभु श्रीकृष्ण सूर्योदय से पूर्व शयन से उठकर अपने माता-पिता देवकी और वसुदेव को वंदन करते थे। अपने माता-पिता और बड़ों को प्रणाम करने से व्यक्ति की चार वस्तुएं आयु, विद्या, यश और बल बढ़ता है। वहीं ऐसा न करने पर यह चारों चीजें कम होती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी चीज मेें अच्छे और बुरे संस्कार होते हैं। इस मौके पर राष्ट्रीय बाबा बाल जी ने कहा कि व्यक्ति के आचरण और व्यवहार से ही उसके कर्मों का पता चलता है। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन समाज के काम आ सके, यही हमारी कामना है। उन्होंने कहा कि दूसरे के दुख को देखकर दुखी होना और उसका दुख बांटना ही पुण्य का कार्य है। उन्होंने कहा कि धन दौलत से तो कई अमीर होंगे, लेकिन असली दौलत तो सेवा में है। उन्होंने कहा कि हम सब देश की समस्याओं को हल करने का प्रयास करें और स्वयं एक जिम्मेदार नागरिक की तरह रहें। उन्होंने कहा कि धर्म हर समस्या को दूर करने का मंत्र है।