अमर उजाला ब्यूरो
मैहतपुर (ऊना)।
स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी के खुले में बहने से बदबूदार हवा की समस्या का पुख्ता हल नहीं हो पाया है। जिला परिषद की बैठकों में इस मसले पर हो चुकी तीखी बहस के बाद अब जिला परिषद सचिव और डीपीओ ऊना ने सदस्य सचिव हिमाचल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चिट्ठी लिखकर कहा है कि जिप बैठकों में बोर्ड के जिला स्तरीय अधिकारी हाजिर नहीं होते जिससे ऐसे मसले का समाधान नहीं हो पा रहा है।
चिट्ठी में अक्तूबर 2017 में हुई जिप बैठक का हवाला देकर लिखा है कि इस बैठक में जिला परिषद रायपुर सहोड़ा वार्ड सदस्य पंकज सहोड़ पिछले कई माह से यह गुद्दा उठाते आ रहे हैं लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिला स्तरीय अधिकारी इस समस्या की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। इस पर लगातार टालमटोल की नीति अपनाए हुए हैं। खुद जिप सदस्य पंकज सहोड़ कई बाद जनता से जुड़ी समस्याओं के बारे में अंडरग्राउंड पाइप के साथ-साथ खुले में बहने वाले गंदे पानी का मुआयना कर शिकायत करते आ रहे हैं।
जिला परिषद सचिव एवं डीपीओ ऊना राज्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण को लिखी सख्त लहजे वाली चिट्ठी से साफ है कि उक्त मसले को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिला स्तरीय अधिकारी संजीदा नहीं है। पिछली बैठक में जिला परिषद प्रतिनिधियों ने प्रदूषण बोर्ड से किसी के भी बैठकों से हाजिर न होने को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई थी। इसमें साफ कहा था कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिला स्तरीय अधिकारी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी ही कर रहे हैं।
अपने स्तर पर ही जांच कर भेजी रिपोर्ट
जिप सदस्य पंकज सहोड़ ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने जिप बैठक में अपने स्तर पर ही जांच करके एक रिपोर्ट भेजी थी। सहोड़ ने कहा कि उद्योगों का गंदा पानी खुले में बह रहा है जिससे लोगों को स्वच्छ हवा भी नसीब नहीं हो रही।
सूचना मिलने पर जाते हैं प्रतिनिधि
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसई डॉ. श्रवण कुमार ने कहा है कि जिप बैठक की जब भी उन्हें सूचना मिलती है, उनका कोई न कोई प्रतिनिधि अवश्य जाता है। उन्होंने कहा कि कई दफा स्टाफ के फील्ड में होने से दिक्कत हो जाती है। स्टाफ कम है, उनके अंडर में दो जिलों का काम हैं।