ऊना। सरकार द्वारा सर्दियों की छुट्टियों को अप्रैल माह में करने से सरकारी स्कूलों के शिक्षक भड़के उठे हैं। प्राथमिक शिक्षकों के अनुसार अगर अप्रैल माह से सरकारी स्कूलों में छुट्टियां होती हैं तो निजी स्कूल सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रलोभन देकर अपने विद्यालयों में ले जाएंगे। जिससे सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में भारी कमी आएगी। गौर रहे कि सरकार की ओर से प्राथमिक स्कूलों में पांच से कम विद्यार्थी होने के चलते कई स्कूलों में बंद किया जा चुका है। साथ ही 10 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों पर भी चर्चा की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि एक ओर सरकार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्री प्राइमरी कक्षाएं शुरू कर रही है तो दूसरी ओर बिना सोचे समझे ऐसे निर्णय लेकर सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने की उम्मीदों पर पानी फेर रही है। वहीं, सरकारी स्कूलों के प्राध्यापकों ने भी सरकार व शिक्षा विभाग के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। प्राध्यापकों का कहना है कि अगर अप्रैल माह के प्रथम दस दिनों में छुट्टियां होंगी तो बोर्ड की परीक्षाओं का वार्षिक परिणाम समय पर नहीं आ पाएगा। क्योंकि जिन दिनों में शिक्षकों की ओर से पेपर चेक करने होते हैं, उन दिनों में सरकार की ओर से स्कूलों की छुट्टियां की जा रही है। प्राध्यापकों ने बताया कि अप्रैल माह पहले दस दिनों में छुट्टियां करने से शिक्षा विभाग व बोर्ड की कार्य प्रणाली का भारी असर पड़ेगा। उधर, उच्चतर शिक्षा उपनिदेशक अमरजीत शर्मा ने बताया कि सरकार की ओर से यह निर्णय बहुत सोच-समझ कर ही लिया गया है।
पुनर्विचार करे सरकार
प्राथमिक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जोगिंद्र सिंह और सचिव राकेश चंद शर्मा ने सरकार से अप्रैल की छुट्टियों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। जिससे प्राथमिक स्कूलों की विद्यार्थियों की संख्या पर कोई प्रभाव न पड़े। संघ सदस्यों ने कहा कि ऐसा न हो कि सरकार की इस गलती से अन्य कई स्कूल भी बंद करने के लिए मजबूर होना पड़े।
गर्मियों में की जाएं छुट्टियां
हिमाचल प्रदेश राजकीय प्राध्यापक संघ के चेयरमैन विनोद बनियाल ने सरकार से मांग की है कि अप्रैल की इन 10 छुट्टियों को मई-जून माह में चलने वाली गर्म लू के दिनों में किया जाए। जिसका लाभ विद्यार्थियों को मिल सके। शिक्षकों का कहना है कि अप्रैल माह में छुट्टियां करना सरकारी स्कूलों के खिलाफ षड्यंत्र लगता है। सरकार को इस निर्णय पर दोबारा सोचना चाहिए।