ऊना। देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल में चल रहे ग्रामीण डाक कर्मियों की हड़ताल मंगलवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गई। लेकिन अभी तक केंद्र सरकार ने इस हड़ताल को खत्म करवाने की दिशा में कोई संजीदगी नहीं दिखाई है। मंगलवार को भी प्रदेश भर के ग्रामीण शाखा डाकघरों में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। ग्रामीण डाक कर्मी अब करो या मरो की रणनीति से मैदान में उतर आए हैं। जीडीएस यूनियन के परिमंडलीय सचिव दाता राम चंदेल ने कहा कि प्रदेश भर से हड़ताल के सफल रहने की सूचना है। उन्होंने कहा कि कमलेशचंद्र कमेटी की सिफारिशों को जानबूझकर लटकाया जा रहा है और उसमें काटछांट करके उसे लागू करने का केंद्र सरकार प्रयास कर रही है, जबकि कमलेशचंद्र कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में ग्रामीण डाक कर्मियों पर कार्य के बोझ के चलते वर्तमान में मिल रहे लाभों को बेहद कम बताया है। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पोस्टल बोर्ड ग्रामीण डाक कर्मियों को उनका हक न देकर घोर अन्याय कर रहा है। उधर, दिल्ली से अखिल भारतीय ग्रामीण डाक कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय महामंत्री एसएस महादैवया ने कहा कि केंद्रीय संचार राज्यमंत्री अड़ियल रवैया अपनाए हुए हैं, और बिना शर्त हड़ताल वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार हड़ताल वापस नहीं होगी और यह आर-पार की जंग है, जिसे लड़ने के लिए देश भर के 2 लाख 76 हजार ग्रामीण डाक कर्मचारी पूरी तरह तैयार हैं। ऊना मुख्य डाकघर में ऊना डाक मंडल के ज्यादातर ग्रामीण डाक कर्मियों ने पोस्टल बोर्ड के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कमलेशचंद्र कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की मांग उठाई। मंगलवार को बलवीर सिंह, दाताराम, सुषमा, सत्यादेवी, मीनाक्षी राणा, नितिश, रामकुमार, कमल, शंभूनाथ, मोहन लाल, प्रमोद, बलविंदर, राजकुमार, अशोक कुमार, सुरेंद्र कुमार, केहर सिंह, नितिन, कश्मीर सिंह, त्रिलोक सिंह, मनोहर लाल, हेमराज, मूलराज, जगतार सिंह, लखवीर सिंह, रामपाल समेत कई ग्रामीण डाक कर्मचारी हड़ताल पर डटे हुए हैं।